Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

शिव शक्ति

शिव ही सत्य हैं और सत्य ही शिव हैं। उनकी पहचान सत्यम् शिवम् सुन्दरम् के रूप में होती है। शिव ही शक्ति हैं और शक्ति ही शिव—दोनों एक ही माला के अनमोल मोती हैं जिनसे संपूर्ण विश्व आलोकित होता है। ब्रह्मा जी ने शिव की प्रेरणा से ही ब्रह्मांड की रचना की और विष्णु जी को सृष्टि के पालन का दायित्व भी शिव ने ही प्रदान किया। सृष्टि का संहार स्वयं शिव के हाथ में है। यही इस सृष्टि का सत्य है। परंतु सदाशिव का प्राकट्य कैसे हुआ—इसका प्रमाण शास्त्रों में नहीं मिलता, क्योंकि वे अनादि और अनंत हैं। त्रिकालदर्शी सदाशिव सबसे बड़े प्रशासक और प्रबंधक हैं, जो सबको उनके उत्तरदायित्व सौंपते हैं और सबके कार्य पर सतर्क दृष्टि रखते हैं। समय-समय पर समीक्षक बनकर और कभी तिर्यक दृष्टि से देखकर वे सभी की सहायता को तत्पर रहते हैं। वास्तव में शिव शब्दातीत और अवर्णनीय हैं—उनकी महिमा अपरंपार है। यही स्मरणीय है कि शंकर ही सदा सेवनीय हैं और वही सभी दुःखों का हरण करने वाले हैं।

Read More