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माँ दुर्गा का आगमन

पूनम शर्मा स्नेहिल, प्रसिद्ध कवयित्री, जमशेदपुर

एरावत पर मात का, हुआ आगमन खास।
जनहित में हो सब यहाँ, यही हृदय में आस।।

नवरात्रि के नौ दिवस, नव रूपों का वास।
करना माँ आकर यहाँ, तू दुष्टों का नाश।।

भक्ति भाव दिल में लिए, आई तेरे द्वार।
विपदा में माँ मैं फँसी, करना तू उद्धार।।

शीश मुकुट शोभित लगे, कंठ सजे है हार।
द्वार तिहारे आ खड़े, नर हो चाहे नार।।

लाल चुनर में लग रहा, दिव्य तुम्हारा रूप।
माथे पर बिंदिया सजी, जैसे खिलती धूप।।

पाव महावर से सजे, कर में मात त्रिशूल।
ममता माई तेरी छवि, करें क्षमा हर भूल।।

हलवा-पूरी और चना, लगा रहे सब भोग।
देना माँ आशीष तू, हर लेना अब रोग।।

देखा आपकी यह छवि, मोहित है संसार।
भक्ति भाव से कर रहे, सब तेरा सत्कार।।

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