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नवरात्रि: भक्ति से शक्ति की यात्रा

“नवरात्रि केवल पर्व नहीं, बल्कि आत्मा की यात्रा है। यह हमें हमारे भीतर की सुप्त शक्ति को पहचानने, हर कठिनाई में छिपे वरदान को देखने और आत्मविश्वास से अंधकार को मिटाने की प्रेरणा देता है।”

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माँ दुर्गा का आगमन

माँ दुर्गा के आगमन और नवरात्रि के उत्सव का सुंदर चित्रण करती है। कवि ने माँ के नौ रूपों के वास, भक्ति और श्रद्धा के भाव, तथा उनके दुष्टों के नाश करने वाले रूप का वर्णन किया है। भक्त अपनी विपत्तियों और संकटों में माँ के सामने आता है, उनका उद्धार माँ से आशा करता है। माँ का रूप लाल चुनर, मुकुट और त्रिशूल के साथ दिव्य और आकर्षक दिखाई देता है, और उनकी ममता और करुणा हर भूल और त्रुटि को क्षमा करने वाली प्रतीत होती है। भक्तों द्वारा हलवा-पूरी और चना जैसे भोग अर्पित किए जाते हैं, और वे माँ से आशीर्वाद की कामना करते हैं। पूरी कविता में भक्ति, श्रद्धा और उत्सव का वातावरण स्पष्ट है, जो संसार को माँ के प्रति प्रेम और सम्मान से मोहित करता है।

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चूड़ियाँ

चूड़ियाँ सिर्फ़ काँच की बनी वस्तुएँ नहीं होतीं। वे माँ के हाथ उठते ही दुआओं का आशीर्वाद बन जाती हैं, बहन के राखी बाँधते ही रिश्तों की मजबूती का प्रतीक बन जाती हैं, और प्रियतम के सानिध्य में खुशियों की खनक। देखने में नाज़ुक और रंग-बिरंगी होने के बावजूद, वे जीवन की डोर को बाँधने और संबंधों को सहेजने का अद्भुत सामर्थ्य रखती हैं। चूड़ियाँ कमज़ोर नहीं होतीं—वे औरत की शक्ति, उसकी संवेदनाओं और उसके अटूट वसूलों का प्रतीक हैं।

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