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प्रकृति…

कभी चलती सर्द हवाओं को सुना तुमने…??
क्या कहती हैं तुमसे…??
बस चलते ही रहो… रुको नहीं,
अपना लक्ष्य प्राप्त करके ही दम लो।

कभी चहचहाते पक्षियों को देखा तुमने…??
क्या सीखा उनसे…??
मेरी ही तरह सदैव खुश रहा करो।

घड़ी की टिक-टिक को तो तुमने सुना ही होगा…
कहती है तुमसे—
कद्र करो वक्त की…
एक बार गया तो वापस नहीं आऊंगा मैं।

रिमझिम बारिश की बूंदों को
क्या महसूस किया तुमने…??
हाँ… कहती हैं, सब्र करो,
सब्र का फल मीठा ही होता है।

जगमग जगनुओं से क्या सीखा तुमने…??
हाँ… अंधेरों में भी रोशनी को
ढूँढा करो।

कुदरत हम मानव को अनजाने में
बहुत कुछ सिखा देती है,
मगर हम इंसान नासमझ ही रहते हैं।

अनिता अरोड़ा, प्रसिद्ध लेखिका, लखनऊ

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