अगर ईश्वर एक है तो हम क्यों बंटे हैं?”

हे प्रभु , हे मेरे रचयिता आपने हम मानुस जात की खोपड़ी के अंदर जो दिमाग नाम की लुगदी भरी है न ? वही लुगदी हलचल करती रहती है, प्रश्न करती है, उत्तर मांगती है , खुश होती है , नाराज़ होती है … तो आज मैं नाराज़ हूँ … मेरी नाराज़गी आप से ही है !!!

यदि मैं आपको अल्लाह कहूँ , यदि मैं आपको ब्रम्हा कहूँ , यदि मैं आपको गॉड कहूँ… तो मैं मुश्किलों में फंस जाऊँगा ! … क्योंकि मैं आपसे प्रश्न पूछना चाहता हूँ …और यदि मैं आपका नाम लेकर प्रश्न करूँ तो आपके अनुयायी , आपके भक्त मुझ पर पिल पड़ेंगे , मुझे तार तार कर देंगे … इसलिए मैं आपको केवल “आप” से ही सम्बोधित करूँगा या फिर “सृष्टिकर्ता” से सम्बोधित करूँगा।

हे सृष्टिकर्ता , मैं मानता हूँ कि आप अनंत ऊर्जा हैं , आपने ही सारे ब्रम्हाण्ड की रचना की है आपने ही सारे जीव जंतु की रचना की है आपने ही केवल मनुष्य जाति को ज्ञान से परिपूर्ण किया है लेकिन आपने स्वयं को सम्पूर्ण विश्व के मनुष्यों पर , एक साथ , एक ही बार में , प्रगट क्यों नहीं किया ? अब देखिये न यहूदियों के अनुसार सबसे पहले उन्होंने आपको पहचाना , मुस्लिमों के अनुसार सबसे पहले आपको उन्होंने जाना और हिन्दू तो सनातन से आपको जानते ही हैं ! आप तो एकमात्र सृष्टिकर्ता हैं लेकिन इन सबने आपकी आई डी अलग अलग बना डाली ! आपका नामकरण भी अलग अलग कर दिया गया ! क्या यह संभव है कि आप जो एकमात्र हैं, आपकी आई डी अलग अलग नाम से बना दी जाये ? अमेरिका कहता है कि हमारे यहाँ केवल जीजस नाम की आई डी ही वेलिड है बाकी सब फेक ! अरब कहता है हमारे यहाँ अल्लाह नाम की आई डी ही कबूल है बाकि सब फेक और भारत कहता है हमारे यहाँ केवल ब्रम्हा नाम की आई डी ही मान्य है बाकी सब फेक !!! प्रभु जी आप चुप क्यों हैं ? छोटा सा तो काम है बस अपना स्पष्ट परिचय देकर आप विलीन हो जाईए ! पूरे विश्व में आपके नाम की केवल एक ही आई डी होगी … सर्वत्र शांति होगी और आपके नामों के बीच जो कॉम्पिटिशन चलता है , आपके नाम पर जो ज़िंदगियाँ बर्बाद हो जाती हैं , सब ख़त्म हो जायेगा ! हमारे आदिकाल से चल रहे झगड़े रगड़े तुरंत ख़त्म हो जायेंगे ! देखिये न हमास वाले “अल्ला हु अकबर” का नाम लेकर पंद्रह सौ यहूदियों का कत्लेआम करके ऐसी ख़ुशी मना रहे थे जैसे आप उन्हें तोहफ़ा स्वरूप जन्नत में डायरेक्ट एंट्री देने वाले हैं वहीँ यहूदी लोग “यहोवा” के नाम पर पचास हज़ार बेगुनाह लोगों का कत्लेआम करके अभी भी रुके नहीं रुक रहें हैं ! हम लोगों ने भी ब्रम्हा के नाम पर ही “ब्रम्होस” बना डाला है जो कभी न कभी विध्वंस करेगा और हम खुश होंगे … हे प्रभु हे रचनाकार , आप इस परिस्थिति की गंभीरता पर ज़रा ध्यान दीजिये न … मानव इतिहास में अधिकतर जितने भी खून खराबे , लड़ाई झगड़े हुए हैं उसकी गर्त में कारण तो आप ही रहे हैं!

आपने स्वयं के नामकरण का जिम्मा हम पर क्यों छोड़ दिया ? इतना तो पक्का है कि “आप” एक ही हैं , रचनाकार एक ही है लेकिन हमारा झगड़ा तो नाम को लेकर ही है न ?… हम सबने आपका अलग अलग नामकरण कर रखा है ! मेरा नाम सहीं … तेरा नाम गलत … क्या आपको नहीं लगता कि दुनिया में ज्यादातर लड़ाई झगड़े , बैर , द्वैष , अराजकता आपके नाम पर ही है ? आपने तो हमें कोई ऐसा नियम, कानून, ग्रन्थ या पोथी उपलब्ध नहीं कराया जो आपके द्वारा लिखित हो और हम हैं कि आपके नाम पर ग्रन्थ पर ग्रन्थ और पोथी पर पोथी लिखे जा रहें हैं और लेखक के रूप में आपके नाम का ठप्पा लगाए जा रहें हैं ! … मेरा ग्रन्थ सहीं … तेरा गलत !

हे अद्वैत हे रचनाकार , हमने तो आपके नाम पर अपनी अपनी सेनाएं भी खड़ी कर ली है ! आपके नाम की रक्षा हेतु ! आपके धर्म की रक्षा हेतु ! … हे सारे ब्रम्हाण्ड के रचयिता क्या आप इतने कमज़ोर हैं कि आपके नाम की रक्षा के लिए हम पिस्सू टाईप के लोग अपना सीना ताने, तीर कमान लिए , तलवार और बंदूक लिए खड़े हो जाएँ ? आपके नाम की रक्षा के लिए, आपके नाम के प्रचार के लिए हम क्रूसेडर्स बन जाते हैं , अन्य धर्मावलम्बियों को मौत के घाट उतार देते हैं ! आपके नाम पर हम जेहादी बन जाते हैं और बेकसूर लोगों का गला आसानी से रेत देते हैं ! आपके नाम की हम सेनाएं बनाकर नंगा नांच कर लेते हैं ! … यह सब आप देखते तो अवश्य होंगे ? … आपके नाम पर ही यह सब घिनौनी हरकतें ?

कितने सुन्दर ग्रह की रचना आपने हमारे लिए की थी ! हरा भरा … गोल आकृति का … ताकि पूरी गोलाई में हम घूमें , साथ साथ रहें , लेकिन हम हैं कि उस गोलाई में अपनी सीमाएं बना डालीं ! ये इस्लामी राष्ट्र , ये ईसाई राष्ट्र , ये हिन्दू राष्ट्र !…. और अब तो इस्लामिक बम , ईसाई बम और हिन्दू बम भी !!!

आप कब तक चुपचाप हमारे नंगे नांच को देखते रहेंगे प्रभु ? … कुछ तो करिये … अन्यथा यह तो पक्का है कि हम स्वयं ही , स्वयं को नष्ट कर डालेंगे !

माफ़ करियेगा प्रभु , गुस्से में लिखा हूँ , क्या करूँ मज़बूर हूँ , जो लुगदी आपने खोपड़ी के अंदर भरी है , वही उफ़ान मार रही है !!!

अनुपम नीता बर्डे, प्रसिद्ध व्यंग्यकार, बिलासपुर

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