आज तो पुलिस के पास अत्याधुनिक संसाधन हैं, पहले ना इतना फोर्स था और न संसाधन । कल्पना कीजिये 27 साल पहले जब सैन्य छावनी वाले महू के सात रास्ता स्कूल में सुबह टाईम बम मिलने की खबर जंगल में आग की तरह फैली होगी तो क्या हालात रहे होंगे।
तब वहां तहसीलदार पदस्थ थे रजनीश श्रीवास्तव, एसडीएम थे आईएएस नीतेश व्यास और एसडीओपी थे अंशुमान सिंह ।
स्कूल में टाईम बम मिलने की सूचना से घबराए प्रिंसिपल ने फोन पर एसडीएम व्यास को जैसे ही सूचना दी उन्होंने तहसीलदार रजनीश श्रीवास्तव और महू थाना को तत्काल स्पॉट पर पहुंचने के निर्देश दिए। आज की तरह तब बम निरोधक दस्ता (बीडीएस) इंदौर पुलिस में नहीं था। व्यास ने महू की सिचुएशन बताने के साथ ही पुलिस मुख्यालय भोपाल को बीडीएस तत्काल रवाना करने के लिए कहा।
महू प्रशासन को टाइम बम मिलने की सूचना सुबह 8.30 के करीब मिली थी। सात रास्ता स्कूल में पुलिस वाहनों और अधिकारियों की हलचल देख कर रहवासियों में भी खलबली मच गई थी। तत्कालीन कलेक्टर एम गोपालरेड्डी और तत्कालीन एसपी देवेंद्र सिंह सेंगर से भी महू प्रशासन सतत संपर्क में था।जिला प्रशासन ने महू छावनी को भी सूचना दे दी थी।
स्थानीय अधिकारियों के सामने चुनौती यह भी थी कि खबर फैलने के साथ ही लोगों की भीड़ भी बढ़ रही थी, जब तक बम निरोधक दस्ता नहीं पहुंचता यह चुनौती भी कम नहीं थी।
इन तीनों अधिकारियों ने स्कूल की छुट्टी कराने के साथ ही टिक..टिक..टिक…टिक की आवाज करते टाइम बम के चारों तरफ बालू रेत की बोरियां भी रखवा दी थी।फायर ब्रिगेड दस्ता भी पास में खड़ा था। स्कूल के आसपास के घरों के रहवासियों को भी किसी बड़ी दुर्घटना से बचाने के लिए मकान से बाहर निकलने, सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए जैसे-तैसे राजी कर लिया। कुछ परिजन थे कि जरूरी कीमती सामान ले जाने की जिद करने लगे, उन्हें रजनीश श्रीवास्तव ने समझाया जान से बड़े जेवर नहीं है, निश्चिंत रहें पुलिस फोर्स आप के मकानों की भी निगरानी करेगा।
बम निरोधक दस्ता भोपाल से रवाना हो चुका था लेकिन महू पहुंचने की दूरी में कम से कम तीन घंटे का समय तो लगना ही था। इस बीच सात रास्ता स्कूल के आसपास जुटी भीड़ में से निकल कर अफसरों के पास पहुंचे दो-तीन जोशीले युवक यह कहने लगे बम फुस्स करने वाले तो जाने कब आएंगे। आप तो हमे जाने दो, हम बम उठाकर फेंक देंगे, मरने से नहीं डरते।
प्रशासनिक अधिकारी उन्हें समझा रहे थे ठीक है आप मरने से नहीं डरते, इस भीड़ भरे इलाके में बम फेंकोगे और फट गया तो ना जाने कितने निर्दोष मरेंगे, उनका क्या? जैसे तैसे इन जोशीलों को समझाइश देकर उनका उतावलापन शांत किया।
बीडीएस का दस्ता पहुंचा तो अधिकारियों ने राहत की सांस ली। इस दस्ते का नेतृत्व कर रहे सिख अधिकारी को अंशुमन सिंह और रजनीश श्रीवास्तव ने पूरी सिचुएशन समझाई। बम निरोधक दस्ते की टीम ने घूम कर आसपास की भौगोलिक स्थिति समझी। बोरियों के बीच पड़े टाइम बम से झांकते पाइप, टिक-टिक की आवाज और हरे-लाल तार आदि को दूर से ही देखा।
अब सरदारजी ने पोजिशन ली, उनकी टीम के अन्य सदस्य ने हेलमेट के साथ ही विस्फोट से बचाव वाला भारी भरकम लबादा पहनाया। बम वाले स्थान तक जाने से पहले उन्होंने आकाश की ओर देखते हुए हाथ जोड़े, अरदास की और चल पड़े टाइम बम के पास। अधिकारी और भीड़ उन्हें जाते हुए देख रही थी।
उनके हाथ में बम से जुड़े तारों को काट कर निष्क्रिय करने वाला औजार था। धीमी गति से वो टाइम बम के नजदीक पहुंचे, इधर सारा हुजूम सांसे रोके उनकी गतिविधि को देख रहा था। उन्होंने टाइम बम को, उन तारों को हल्के से छुआ जो बम के साथ जुड़ दोनों पाइप से लगे हुए थे…।
सरदार जी ने पहले औजार से लाल तार को काट के अलग किया ही था कि लोग तालियां बजाने लगे, फिर उन्होंने दूसरा तार भी काट दिया…घड़ी की टिक टिक बंद हो गई और अब तालियों के साथ ही भारतमाता के जयकारे भी गूंज रहे थे।
सरदार जी दोनों हाथ विजयी मुद्रा में उठाए प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ बढ़ रहे थे। बीडीएस के साथियों ने उनका हेलमेट और विस्फोटक निरोधक वजनी लबादा उतारा। उन्हें बधाई देने के लिए अधिकारियों ने हाथ आगे बढ़ाया ही था कि उन्होंने रजनीश श्रीवास्तव से कहा सर, जरा मेरी पीठ पर टीशर्ट उठाकर देखिये। श्रीवास्तव ने हाथ लगाया उनकी टीशर्ट और शरीर पसीने से तरबतर था।सरदार जी बता रहे थे कि बम से जो छोटे पाइप जुड़े थे वो अंडर ग्राउंड बिजली फिटिंग में काम आने वाले थे।इनमें बारुद वगैरह तो थी नहीं। टिट टिक करती इलेक्ट्रॉनिक घड़ी थी जिसे बम नुमा खाली खोल के साथ फिट कर रखा था।
अब अधिकारियों को भी लगा कि भले बम निरोधक दस्ता पहना था लेकिन जान बचाने की जिम्मेदारी निभाने की चुनौती के साथ अपनी जान बचाने कि चिंता भी रहती है।श्रीवास्तव और सरदारजी के बीच चर्चा चली कि बम डिफ्यूज करने के इतने अनुभव के बाद भी डर आप का पीछा नहीं छोड़ता ? उन्होंने एक अंग्रेजी फिल्म का किस्सा सुनाया कि कैसे पनडुब्बी में दुश्मन बम फिट कर देते हैं लेकिन इसकी जानकारी लगने पर जब बम फिट करने वाले से बम निष्क्रिय करने के लिए पूछताछ की जाती है तो वह लाल वाला तार काटने पर बम निष्क्रिय होने की बात कहता है लेकिन दुश्मन की बात पर भरोसा नहीं करते हुए पूछताछ करने वाले बम से जुड़ा हरा तार काट देते हैं, बम निष्क्रिय हो जाता है।फिल्म के इस दृश्य में जब उस दुश्मन से तार संबंधी गलत जानकारी देने का कारण पूछा जाता है तो वह कहता है लाल तार पहले काट देते तो ये पूछताछ के लिए कोई जिंदा नहीं बचता।
श्रीवास्तव बताते हैं अभी भी जब कभी महू जाना होता है तो सत्ताइस साल पुरानी इस घटना को लेकर हार्डवेयर व्यापारी महेश (दयाल) अग्रवाल और उनके अन्य मित्र पूरा घटनाक्रम दोहराने के साथ यह पूछना नहीं भूलते कि क्या सही में टाइम बम था? आज भी जब सात रास्ता स्कूल से जुड़ी घटना याद करता हूं तो यह सोंच कर कंपकंपी आ जाती है कि कभी सच में टाईम बम होता तो? बीडीएस के साथी की जरा सी गलती से बम फट जाता तो ?
▪️इस किस्से से जुड़े अधिकारियों में- रजनीश श्रीवास्तव एक वर्ष पूर्व संभागायुक्त कार्यालय से (अपर कलेक्टर-उपायुक्त राजस्व) से सेवानिवृत्त हुए हैं । वे सतना, इंदौर, झाबुआ, धार, खंडवा, बड़वानी, उज्जैन में विभिन प्रशासनिक पदों पर रहे चुके हैं।
तत्कालीन एसडीएम नीतेश व्यास वर्तमान में निर्वाचन आयोग दिल्ली में पीएस है।
उस वक्त एसडीओपी रहे अंशुमान सिंह अभी आईजी भोपाल पदस्थ हैं।

कीर्ति राणा,
वरिष्ठ पत्रकार और कॉलमिस्ट, इंदौर
बहुत बढ़िया
बहुत खूब
दम साधकर पढ़ते रहा 👍🏻
जा बाज सरदार जी का जा बाज साहसिक कार्य। जितनी तारीफ करें उतनी कम।जय हिन्द