विरासत में मिली करुणा, कर्म में उतरी सेवा

राजेश कांठेड़

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे

जब बात सेवा, करुणा और संवेदना की होती है, तो कुछ नाम स्वतः ही स्मरण में आ जाते हैं ऐसे ही एक प्रसिद्ध समाजसेवी हैं, राजेश कांठेड़. जिनका जीवन मानव सेवा, जीवदया और परोपकार के कार्यों को समर्पित है. अपने पिताजी और दादाजी से सेवा का संस्कार विरासत में पाकर उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी न केवल जरूरतमंदों की मदद की, बल्कि मूक पशु-पक्षियों तक की चिंता की. चाहे वह वैश्विक महामारी कोरोना का संकट हो या गर्मी में पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्थाइनके कार्य समाज के लिए एक जीवंत उदाहरण हैं. अपने परिवार के साथ, जिन्होंने चिकित्सा सेवा को जीवन का ध्येय बनाया है, यह व्यक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए सच्ची सेवा और समर्पण का संदेश देते हैं. श्री कांठेड़ ने अपने कार्यो के बारे में लाइव वायर न्यूज ने संपादक सुरेश परिहार से बातचीत के बारे में विस्तारपूर्वक बताया. प्रस्तुत हैं उनके विचार, अनुभव और भविष्य की योजनाओं के प्रमुख अंश-

सवाल- आपकी जीवनशैली में जीवों के प्रति करुणा और सेवा का भाव प्रमुख रूप से दिखाई देता है| कृपया बताएं, यह संवेदना आपको कहां से प्राप्त हुई?
जवाब- मानवसेवा की प्रेरणा तो मुझे विरासत में मिली है, पिताजी और दादाजी को हमेशा जरुरतमंदों की सेवा और मदद करते हुए देखा है. उन्हीं से यह प्रेरणा मिली है. हम इस विरासत को आगे भी बढ़ाते जाएंगे.
सवाल वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान जब सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त था, उस कठिन समय में आपने गरीबों को भोजन वितरित करने का कार्य किया| उस अनुभव को आप कैसे याद करते हैं?
जवाब-कोरोना के समय मानव सेवा के साथ ही देखा की मूक पशु भी काफी सुस्त हो गए थे. पशु-पक्षियों के लिए एक टीम बनाकर पूरे नगर में सेवा करने का अवसर मिला. इसके बावजूद भी कोरोना में औेर अधिक सेवा करने की टीस मन में रह गई है.
सवाल- गायों एवं मूक पशुओं के लिए चारे की नियमित व्यवस्था करना अत्यंत सराहनीय कार्य है| इस दिशा में आपकी प्रेरणा का स्रोत क्या रहा
जवाब-
गायों और बेसहारा पशुओं एवं पक्षियों के लिए नियमित सेवा की जाती है. स्थानीय श्रीकृष्ण गौशाला गोगापुर में कुछ साथियों के साथ कार्य प्रारंभ किया था. आज वहां सैंकड़ों युवा और परिवार जुड़कर सेवा कार्य कर रहे हैं. इसके आगे भी हम पशुओं और पक्षियों के कल्याण के लिए बड़ी योजना पर काम कर रहे हैं. ईश्‍वर हमें इसमें सफलता अवश्य प्रदान करेगा.


सवाल-वर्तमान ग्रीष्मकालीन परिस्थितियों को देखते हुए आपने पक्षियों के लिए जल की व्यवस्था की है| इस पहल को आपने किस प्रकार क्रियान्वित किया और उसका समाज पर क्या प्रभाव पड़ा?
जवाब-
गर्मी में पशु पक्षियों के लिए पानी अत्यंत आवश्यक होता है. इस योजना पर हम १० सालों से काम कर रहे हैं. जिनमें पेड़ों पर सकोरे लगाना, उनमें नियमित रूप से पानी भरवाना तथा पक्षियों के लिए दाना, पशुओं के लिए शहर जगह-जगह हौद लगवाए हैं. जिससे पशुओं को पानी पीने में आसानी हो जाती है.


सवाल- शारीरिक रूप से असहाय, विशेषकर बेड रिडन मरीजों के लिए आवश्यक उपकरणों की निःशुल्क व्यवस्था आपकी मानवीय सोच को दर्शाती है. इस सेवा कार्य की रूपरेखा कैसे बनी और इसे कैसे संचालित किया जा रहा है?
जवाब-
मैं एक बार अपने परिचित के यहां बीमार वृद्ध माताजी का देखने के लिए गया था. उन्हें पानी पिलाना, दवा देना, भोजन आदि के लिए बार-बार उठाना-बैठाना बीमार व्यक्ति औेर परिजनों को काफी पीड़ादायक काम था. उसी दिन से यह विचार आया कि क्यों ने ऐसे लोगों के लिए डॉ. पलंग उपलब्ध कराया जाए. इसके बाद हम पिछले आठ वर्षों से डॉ. पलंग, एयरबेड, व्हील चेयर, आक्सीजन, कमोड सीट, स्टीक नेबोलाइजर मशीन, निःशुल्क उपलब्ध करवा रहेे हैं.

सवाल-यह जानकर प्रसन्नता होती है कि आपके परिवार के सदस्य, बेटा, बहू और बेटीसभी चिकित्सक हैं, और समाज के वंचित वर्ग के उपचार को प्राथमिकता देते हैं. क्या यह सेवा भावना पारिवारिक विरासत है?
जवाब-
बच्चों के बारे में क्या बताएं, युवा वर्ग कहीं न कहीं राष्ट्र एवं सामाजिक कार्य में संलग्न है. मेरी भी यही इच्छा थी. निशक्त और गरीब जनों को उचित चिकित्सा मिले, कोरोना और डेंगू जैसी बीमारी के समय बेटे ने अच्छा कार्य किया तथा आगे भी वे समाज को अच्छी सेवा देते रहें. ऐसी मेरी इच्छा है, क्योंकि मेरे पिताजी स्व. सौभाग्यमलजी कांठेड़ ने भी निःशक्त और गरीब लोगों के लिए मेडिकल सेवा उपलब्ध कराई थी. हमें यह संस्कार विरासत में मिल हैं.

सवाल- अपने विभिन्न सेवा कार्यों के दौरान आपको किन-किन प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है? आप उनका समाधान किस प्रकार करते हैं?
जवाब-
चुनौतियां जीवन का हिस्सा है, परंतु मेरा ऐसा मानना है कि कार्य प्रारंभ करो तो कठिनाइयों धीरे-धीरे किनारा कर लेती है. एक्सीडेंट में घायल पशुओं को इलाज के लिए भेजना एक चुनौती वाला कार्य होता है. इसके लिए भी कुछ न कुछ सहयोग मिल ही जाता है.


सवाल-क्या आपके इन प्रयासों में समाज अथवा प्रशासन से कोई सहयोग प्राप्त होता है? यदि हॉं, तो किस स्वरूप में?
जवाब
-सहयोग के लिए मेरा ऐसा मानना है कि मानवसेवा, समाज सेवा और जीवदया ऐसा कोई भी परोपकार का कार्य करते जाओ तो लोग आपसे में जुड़ते ही जाते हैं, लेकिन इसके लिए मन, व्यवस्था एवं हिसाब बहुत ही साफ होना चाहिए.गौसेवा के लिए मोहनयादव सरकार अच्छा कार्य कर रही है. गौशाला के लिए प्रतिमाह प्रतिगाय अंश प्राप्त होता है. बहुत जल्दी यह राशि दो गुनी कर दी जाएगी.

सवाल- आपके दृष्टिकोण में सच्ची सेवा का क्या अर्थ है? समाज के युवाओं को आप इस संदर्भ में क्या संदेश देना चाहेंगे?
जवाब-
बिना स्वार्थ मानव सेवा जीवदया, समाज सेवा, राष्ट्र सेवा के कार्य करते चलो, जीवन क्षण भंगुर है. जब भी समय मिले बिना फिजुल खर्च किए इन कार्यो के बारे में विचार करना चाहिए. यह कार्य धीरे-धीरे प्रेरणादायक बनते जाएंगे. युवा आपके साथ जुड़ते जाएंगे.
सवाल- भविष्य की दृष्टि से, क्या आप अपने सेवा कार्यों को किसी विशेष दिशा या क्षेत्र में विस्तार देने की योजना बना रहे हैं?
जवाब-
व्यसन मुक्त हो भारत हमारा एवं मानवसेवा जीवदया के क्षेत्र में अभी बहुत कार्य करने की आवश्यकता है. हम सब मिलकर इस कार्य को अच्छे तरीके से कर सकते हैं.

3 thoughts on “विरासत में मिली करुणा, कर्म में उतरी सेवा

  1. आपने इस प्लेटफार्म पर जो स्नेह दिखाया है उसके लिए दिल से आभार, लेखकों की रचनाओं पर भी अपनी टिप्पणी अवश्य प्रदान कीजिए और वेेबसाइट के बारे में भी अपनी अमूल्य राय दें ताकि भविष्य में इसमें अच्छे परिवर्तन किए जा सकें. आपके सुझाव हमारे लिए बेशकीमती है. अपनी राय अवश्य प्रकट करें.
    – सुरेश परिहार

  2. बहुत खूब आज की आपा धापी के जीवन में ये अद्भुत सेवा है।
    बहुत बहुत बधाई 👏

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *