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विरासत में मिली करुणा, कर्म में उतरी सेवा

“सेवा का भाव मेरे लिए कोई काम नहीं, जीवन का उद्देश्य है।”ये शब्द उस संवेदनशील समाजसेवी के हैं जिन्होंने कोरोना काल से लेकर आज तक मूक पशुओं, पक्षियों, जरूरतमंदों और असहायों के लिए अथक सेवा की है। चाहे पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था हो, गौशाला में चारे की सेवा या फिर बेड रिडन मरीजों के लिए निःशुल्क उपकरण हर कार्य में करुणा, प्रतिबद्धता और पारिवारिक संस्कारों की झलक मिलती है।

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