
शावर भकत ‘भवानी’
कठिन है ना!
स्वयं को धोखा देना।
समझकर भी समझाना,
अनभिज्ञ बनना।
कहा अनकहा,
सुना अनसुना।
अंतर्निहित करना,
प्रस्ताव अवहेलना।
अबूझ ढोंग जताना,
दिल को फुसलाना।
दिमाग की सुनना,
मौन संग्रहित करना।
भावना नकारना,
कृत्रिम दूरी सजाना।
प्राकृतिक निकटता संजोना,
अपरिचित बने रहना।
मिथ्या स्वाँग रचना,
कहा को अनसुना करना।
अनकहा को सुना बताना,
नैनों को लिपि सिखाना।
अधरों को कलम बनाना,
व्यक्त-अव्यक्त से कतराना।
सीमाओं में
पगविहीन होना,
पाबंदियों में
स्वयं से विहीन होना।
समय की
अधीनता स्वीकारना,
प्रारब्ध के समक्ष
नतमस्तक होना।
शूल की चुभन
आजीवन सहना,
उच्चतम अनुभूति में रमना।
कहा-अनकहा संग
प्रस्थान करना,
सुना-अनसुना संग
शून्य में विलीन होना।।
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