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अनमोल प्रेम

रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बाँधती बहन

पूनम सिंह वत्सला, जमशेदपुर

भैया घर आई बहन, लेकर प्रीति अपार।
राखी बाँधी हाथ पर, बही नेह की धार।।

पावन राखी पर्व का, नाता यह अनमोल।
नेह बँधी इस डोर में, चलो महका दें बोल।।

कच्चे धागे से बँधा, समरस प्रेम अनूप।
नेह रहे हर पल सदा, नाता सरस स्वरूप।।

भ्रात-बहिन इस पर्व पर, आपस में हो सम्मान।
सुख-दुख के साथी सदा, ईश्वर का वरदान।।

नित्य शुभेच्छा बहन की, भाई को आशीष।
रक्षाबंधन पर्व शुभ, कहे सत्य जगदीश।।

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