
पूनम सिंह “वत्सला “जमशेदपुर झारखंड
बने हो मित्र तो निभाना सीखो,
शिकायत नहीं, बस निभाना सीखो।
मुश्किलें बहुत आएँगी रास्ते में,
हिम्मत से अपने कर्तव्य निभाना सीखो।
काँटे तुम्हें बहुत मिलेंगे पथ पर,
उन शूलों पर भी चलना सीखो।
मतलबी भरी इस दुनिया में,
खुद पर विश्वास रखना सीखो।
मुझको खुद से ज्यादा तुम पर यकीन,
मेरे साथ हिम्मत से खड़े रहना सीखो।
है विश्वास मुझे उस ईश्वर पर,
अपने दिल में उसकी ज्योत जलाना सीखो।
अपने जज़्बातों से घबराना मत कभी,
मंजिल पानी है तो हौसला रखना सीखो।
आकाश में उड़ान भरनी है अगर,
जिंदगी को खुलकर जीना सीखो।
मुसीबतें तो आती-जाती रहती हैं,
उन्हें किनारे कर हँसकर जीना सीखो।
