
डॉ. शशिकला पटेल, मुंबई
यूँ तो ज़माने में कई दोस्त मिल जाएँ,
दोस्त वही दोस्त जो वक़्त पर काम आएँ।
गर हौसला बुलंद है तो राह बहुत है,
खुशहाल ज़िंदगी के हमराह बहुत हैं।
ग़म-ए-ज़िंदगी में साया भी छोड़ जाए,
दोस्त वही दोस्त जो वक़्त पर काम आए।
लाख तूफ़ाँ आए, दामन न छोड़ो यार का,
फ़क़्त इंतहाँ है ये दोस्ती का, प्यार का।
आग में तपकर सोना भी निखर जाए,
दोस्त वही दोस्त जो वक़्त पर काम आए।
ये दौलत, ये शोहरत हरदम न काम आएँगे,
चंद रोज़ के मेहमान हैं, एक दिन ये खो जाएँगे।
सच्चा दोस्त लेकिन ताउम्र साथ निभाए,
दोस्त वही दोस्त जो वक़्त पर काम आए।
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