रिश्तों में “बेंचिंग” क्या है और इससे कैसे बचें ?

वह कभी बहुत प्यार से बात करता है, फिर अचानक कई दिनों तक गायब हो जाता है. जब आप उसे भूलने की कोशिश करते हैं, तभी उसके हाय, हैलो या आई मिस यू वाले मैसेज फिर उम्मीद जगा देते हैं…अगर यह कहानी आपको अपनी लग रही है, तो संभव है कि आप किसी के प्यार में नहीं, बल्कि उसके बैकअप प्लान में हों. आज की डिजिटल दुनिया में इस व्यवहार को बेंचिंग कहा जाता है.
दिलचस्प बात यह है कि बेंचिंग कोई नई समस्या नहीं है, सिर्फ उसका नाम नया है. पहले भी लोग रिश्तों में यही करते थे, लेकिन तब इसे उम्मीद पर लटकाए रखना, न हाँ करना, न ना करना या रिश्ता अधर में रखना कहा जाता था.
आखिर क्या है बेंचिंग?
खेलों में जब कोई खिलाड़ी मैदान में नहीं खेल रहा होता, तो उसे बेंच पर बैठाया जाता है. रिश्तों में भी यही होता है.बेंचिंग का मतलब है किसी व्यक्ति को न पूरी तरह अपनाना, न पूरी तरह छोड़ना. उसे इस उम्मीद में अपने जीवन में बनाए रखना कि अगर वर्तमान रिश्ता सफल नहीं हुआ, तो वह दूसरा विकल्प बनकर मौजूद रहे.यानी सामने वाला आपको इतना अपनापन देता है कि आप उम्मीद न छोड़ें, लेकिन कभी इतनी स्पष्टता नहीं देता कि रिश्ता आगे बढ़ सके.
एक छोटी-सी कहानी…
मान लीजिए राहुल और सिमरन की मुलाकात होती है. शुरुआत में सब कुछ अच्छा चलता है. मुलाकातें होती हैं, लंबी बातें होती हैं और सिमरन को लगता है कि रिश्ता गंभीर हो रहा है.
फिर अचानक राहुल बदलने लगता है.
मैसेज का जवाब दो-दो दिन बाद…फोन कम…मुलाकातें लगभग बंद…
लेकिन जब भी जवाब आता है, उसमें वही अपनापन होता है. ऑफिस में बहुत काम था… तुम्हारी बहुत याद आई. सिमरन फिर मान जाती है.
असल में राहुल किसी और लड़की को भी डेट कर रहा है. लेकिन वह सिमरन को पूरी तरह छोड़ना नहीं चाहता. अगर दूसरा रिश्ता नहीं चला, तो उसके पास लौटने के लिए कोई तो हो.यही है बेंचिंग.
क्या पहले पुरानी पीढ़ी में भी ऐसा होता था? तो इसका उत्तर है बिल्कुल.आज फर्क सिर्फ इतना है कि पहले व्हाट्सऐप नहीं था, चिट्ठियाँ थीं.
आज सीन करके जवाब नहीं दिया जाता. पहले चिट्ठी का जवाब महीनों बाद आता था. आज लास्ट सीन दिखता है.पहले लोग कहते थे.न हाँ करता है, न ना… बस उम्मीद लगाए रखता है.या फिर…रिश्ता पक्का भी नहीं करता और छोड़ता भी नहीं.यानी व्यवहार वही था, बस शब्द बदल गए. पुरानी पीढ़ी की टालमटोल बनाम आज की बेंचिंग
पहले किसी रिश्ते को वर्षों तक अधर में रखा जाता था. शादी की बात हर बार किसी नए बहाने से टाल दी जाती थी. कभी नौकरी, कभी परिवार, कभी जिम्मेदारियाँ.प्रेम-पत्रों का सिलसिला भी कुछ ऐसा ही होता थाएक चिट्ठी आई, उम्मीद जगी… फिर महीनों सन्नाटा.आज वही कहानी सोशल मीडिया पर दिखाई देती है. मैसेज आएगा…रील भेजी जाएगी…हार्ट इमोजी भी मिलेगा…
लेकिन रिश्ते को नाम देने की बात आते ही जवाब होगा.
अभी थोड़ा समय दो…लोग ऐसा क्यों करते हैं?
रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इसकी सबसे बड़ी वजह है (फोमो- Fear of Missing Out)) यानी कहीं कोई बेहतर विकल्प छूट न जाए. कई लोग एक रिश्ते में पूरी तरह निवेश करने के बजाय कई विकल्प खुले रखते हैं. उन्हें अकेले रहने से डर लगता है, लेकिन किसी एक के प्रति पूरी प्रतिबद्धता निभाने का साहस भी नहीं होता.
कैसे पहचानें कि आप बेंच पर बैठे हैं ?
अगर इनमें से अधिकांश बातें आपके रिश्ते में हैं, तो सावधान हो जाइए.सामने वाला कभी बहुत करीब आता है और फिर अचानक गायब हो जाता है. रिश्ते को लेकर कभी स्पष्ट जवाब नहीं देता.हमेशा कोई-न-कोई बहाना तैयार रहता है.आपको तभी याद करता है, जब उसके पास समय हो.भविष्य की बात आते ही विषय बदल देता है.आपको खोना भी नहीं चाहता और अपनाना भी नहीं चाहता.इसका असर सिर्फ दिल पर नहीं, दिमाग पर भी पड़ता है.मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, लगातार अनिश्चित रिश्ते में रहने से व्यक्ति का आत्मविश्वास कम होने लगता है. वह खुद को दोष देने लगता है, चिंता और भावनात्मक थकान महसूस करता है. धीरे-धीरे उसे लगता है कि शायद उसमें ही कोई कमी है, जबकि कई बार समस्या उसकी नहीं, बल्कि सामने वाले की असमंजस भरी मानसिकता होती है.
खुद को कैसे बचाएँ?
रिश्ते को लेकर स्पष्ट सवाल पूछिए.यदि जवाब हमेशा गोलमोल हो, तो संकेत समझिए. अपनी भावनात्मक सीमाएँ तय कीजिए.हर बार तुरंत उपलब्ध रहना आपकी जिम्मेदारी नहीं है. खुद को विकल्प मत बनने दीजिए. जो आपको सचमुच चाहता है, वह आपको प्राथमिकता देगा, प्रतीक्षा सूची में नहीं रखेगा. अपने आत्मसम्मान को सबसे ऊपर रखिए.रिश्ता तभी स्वस्थ होता है, जब उसमें सम्मान, विश्वास और स्पष्टता हो.
आखिर में…
रिश्तों की दुनिया में तकनीक बदल गई है, लेकिन इंसानी भावनाएँ नहीं. पहले लोग उम्मीद पर लटकाए रखते थे, आज उसे बेंचिंग कहा जाता है. पहले चिट्ठियाँ इंतज़ार कराती थीं, आज नोटिफिकेशन उम्मीद जगाते हैं. फर्क सिर्फ माध्यम का है, दर्द का नहीं..जो व्यक्ति आपको सचमुच चाहता है, वह आपको कभी बैकअप प्लान बनाकर नहीं रखेगा.वह आपको अपने जीवन में प्राथमिकता देगा, विकल्प नहीं.
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