रिक्तता

कठिन समय में एक मित्र का दूसरे परिवार का सहारा बनता भावनात्मक दृश्य

डॉ. मधु आंधीवाल

दुनिया की इस भीड़ में बहुत लोग मिलते हैं। दोस्ती भी होती है, पर सच्चा दोस्त वह होता है, जो बुरे समय में भी साथ न छोड़े।

मेरे जीवन का एक ऐसा अनुभव, जो केवल जान-पहचान से दोस्ती में बदला और फिर कब, कैसे वह पारिवारिक मित्र हो गए। दोस्ती न जाति देखती है, न धर्म, जहाँ बस एक प्यारा-सा रिश्ता होता है। जरूरी नहीं कि पुरुष ही पुरुष का मित्र होगा और महिला ही महिला की। वह एक अधिकारी थे। रिजर्व कोटे से मेरा भी ऑफिस जाना-आना होता था। शुरू-शुरू में काम अटकते, तब उनसे नोंक-झोंक हो जाती, पर वह काम कर देते थे। पीछे वह सबसे मेरी बहुत तारीफ करते थे। मुझे सब पता लग जाता था।

उसी समय मेरे पतिदेव को अटैक आ गया। मैं तुरंत रात में ही दिल्ली लेकर गई। वहाँ पूरा इलाज हुआ। उस समय बेटियों की शादी हो गई थी। बेटा बाहर एम.बी.ए. कर रहा था। मैं और मेरे पतिदेव अकेले रहते थे।

जब उनको किसी से पता लगा, तब बहुत परेशान हुए। उस समय मोबाइल कॉल बहुत महँगी थी। मेरे पास मोबाइल नहीं था। उनकी बात मेरी छोटी बेटी से हुई। बेटी बहुत रो रही थी। वह उसे बहुत हिम्मत देते रहे। जब वह अस्पताल आई, उसने मेरी बात कराई। एकदम से बोले, “तुम बिल्कुल मत घबराना। मैं कल आता हूँ।”

मैंने कहा, “नहीं सर, अब ऑपरेशन हो गया है। अब सुधार है।”

एकदम से बोले, “रात को लेकर गई, रुपयों का इंतजाम कैसे किया?”

मैं चुप हो गई। मैंने कहा, “बैंक बंद थे और जो बैंक का सारा हिसाब देखते हैं, वह स्वयं अस्पताल में थे। बस कुछ भाई से और कुछ इधर-उधर से इंतजाम करके लाई।”

मैंने कहा, “चार दिन पीछे छुट्टी मिल जाएगी।”

जब मैं इन्हें घर लेकर आई, वह सबसे पहले आए और कैश लेकर आए। मेरे पतिदेव को बहुत हिम्मत दी और मुझसे कहा, “सबके रुपये लौटा दो।”

उस दिन मुझे महसूस हुआ कि अपना कोई रिश्ता न होकर भी वह सबसे अधिक करीब हैं। उसके बाद वह मेरे पति और मेरे बच्चों के भी मित्र हो गए। एक तरह से मेरे परिवार के संरक्षक बन गए।

पर कभी-कभी ईश्वर भी अच्छे शख्स को पटकनी दे देता है। अचानक उनका बी.पी. हाई हो गया और गर्दन में दर्द हुआ, फिर वह कोमा में चले गए। पाँच साल कोमा में रहने के बाद वह ईश्वर के पास चले गए।

मेरे लिए यह बहुत बड़ा झटका था, क्योंकि वह मित्रता आत्मिक थी। वह मेरे बिना कहे, मेरे चेहरे से ही मेरे भावों को समझ लेते थे।

शायद वह रिक्तता कभी भर नहीं सकेगी।

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