
अर्चना वर्मा सिंह, मुंबई
जय गुरुवर जय,जय-जय गुरुवर
ज्ञान पुंज अरु छाया तरुवर।
बीच भॅंवर जब नैया अटकी
दूर कहीं एक ज्योति चमकी
दिव्य अलौकिक ऊर्जा अद्भुत
परम ब्रह्म सम ज्योति निकली।
जब-जब प्रभु लिए अवतारा
प्रशस्त किये पथ तुम ही रघुवर।
बन ज्ञान पुंज छाया तरुवर
जय गुरुवर जय,जय-जय गुरुवर।।
गुरु चरणों में शीश झुकाया
प्रभु सदृश गुरुवर को पाया
अज्ञानता का तिमिर तब
हृदय भीत ठहर न पाया।
तुम ही हो सृष्टि संचालक
आदि अंत तुम हो सर्वेश्वर।
ज्ञान-पुंज अरु छाया तरुवर
जय गुरुवर जय,जय-जय गुरुवर।।
लौकिक और अलौकिक संशय
क्षणभंगुर नहीं जीवन अक्षय
कर्म श्रेष्ठ तुम पाठ पढ़ाते
सीखलाते हो समय का संचय।
मुक्ति मोक्ष प्रारब्ध निहित है
प्रथम पूज्य तुम ही हो अनवर।
ज्ञान पुंज अरु छाया तरुवर
जय गुरुवर जय,जय-जय गुरुवर।।
जय गुरुवर जय,जय-जय गुरुवर
ज्ञान पुंज अरु छाया तरुवर।
