ज्ञान का प्रकाश फैलाते दिव्य गुरु के चरणों में नतमस्तक शिष्य

जय गुरुवर

जय गुरुवर” गुरु की महिमा, ज्ञान, कर्म और आध्यात्मिक चेतना को समर्पित एक ओजपूर्ण एवं भक्तिमय कविता है। इसमें गुरु को ज्ञान का पुंज, जीवन रूपी नौका के पथप्रदर्शक और अज्ञान के अंधकार को दूर करने वाले परम प्रकाश के रूप में चित्रित किया गया है। कविता यह संदेश देती है कि गुरु ही जीवन को सही दिशा, श्रेष्ठ कर्म और मोक्ष का मार्ग दिखाते हैं। श्रद्धा और भक्ति से ओत-प्रोत यह रचना भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा का सुंदर एवं प्रेरक स्वरूप प्रस्तुत करती है।

Read More