रिक्तता
“रिक्तता” एक हृदयस्पर्शी संस्मरण है, जिसमें लेखिका ने एक ऐसे मित्र को याद किया है जो रक्त संबंध न होते हुए भी परिवार का अभिन्न हिस्सा बन गए। कठिन समय में उनका निस्वार्थ सहयोग, आत्मीय अपनापन और जीवनभर का स्नेह इस रचना को भावनात्मक ऊँचाई प्रदान करता है। उनके निधन के बाद जीवन में बनी रिक्तता पाठकों को सच्ची मित्रता के वास्तविक अर्थ से परिचित कराती है। यह संस्मरण बताता है कि सच्चे रिश्ते खून से नहीं, बल्कि विश्वास, संवेदना और साथ निभाने से बनते हैं।
