
ममता जाट, टोंक
क्या होगा इस भरत धरा का,क्या होगा परिवेश का।
क्या होगा गौतम,नानक और,महावीर संदेश का।
पूछ रही हूँ आज व्यथित हो पीड़ा मन में लिए हुए।
तुम्ही बताओ राम मेरे,क्या होगा भारत देश का।
आज स्वार्थ हित करने बैठे भारत माँ का चीर हरण।
सत्ता के भूखो ने दे दी देशद्रोह को फिर से शरण।
शत्रु का गुणगान ये करते खा-खा कर इस देश का।
तुम्ही बताओ राम मेरे क्या होगा भारत देश का।
छोड़ दिए मासूम परिंदे,मरने को क्यों नीड़ो ने।
भोले मन में ज़हर भर दिया वामपंथ के कीड़ों ने।
संविधान की आड में करते फिर अपमान स्वदेश का।
तुम्ही बताओ राम मेरे क्या होगा भारत देश का।
संतो का उपहास उड़ाते,माँ को गाली देते हैं
कर अपमान सनातन का ये निर्लज्ज ताली देते हैं।
संस्कार रख दिए ताक में, पाकर फंड विदेश का।
तुम्ही बताओ राम मेरे,क्या होगा भारत देश का।
भान नहीं इतना भी जिनको,हम नर हैं या नारी हैं।
देश बचाने निकले हैं ये,मती गई क्या मारी है।
लांघ रहे मर्यादा इनको होश नहीं निज वेश का।
तुम्ही बताओ राम मेरे क्या होगा भारत देश का।
पहले विवेक मर जाता है जब नाश मनुज पर छाता है।
ये चोर-चोर मोसेरे भाई, इनका गहरा नाता है।
सबक सिखाओ गद्दारों को इंतज़ार आदेश का।
तुम्ही बताओ राम मेरे क्या होगा भारत देश का।
