भारत के मानचित्र और उगते सूर्य की प्रतीकात्मक कलात्मक छवि

क्या होगा भारत देश का ?

वर्तमान सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय परिस्थितियों पर प्रश्न उठाती यह ओजपूर्ण हिंदी कविता भारत के भविष्य को लेकर कवयित्री की चिंता और भावनाओं को अभिव्यक्त करती है। कविता में भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक परिवर्तनों पर चिंतन करते हुए भगवान राम से प्रतीकात्मक संवाद के माध्यम से अनेक सवाल पूछे गए हैं। यह रचना पाठकों को आत्ममंथन और विचार के लिए प्रेरित करती है।

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सीता चाहिए, तो राम भी बनो

यह कविता समाज में व्याप्त दहेज प्रथा, एसिड अटैक, महिलाओं के प्रति हिंसा और दोहरे मापदंडों पर तीखा प्रश्न उठाती है। साथ ही यह पुरुषों को राम और कृष्ण जैसे आदर्शों का अनुसरण कर नारी सम्मान की रक्षा करने का संदेश देती है।

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