डायबिटिक रेटिनोपैथी के उपचार में नई संभावनाएं

पुणे। मधुमेह के कारण होने वाली गंभीर नेत्र बीमारी डायबिटिक रेटिनोपैथी के उपचार में बड़ी सफलता मिलने का दावा किया गया है। पुणे की रसायनी बायोलॉजिक्स द्वारा विकसित आयुर्वेद-प्रेरित ‘तिमिरेक्स-आर’ नामक नैनो तकनीक आधारित मौखिक उपचार पद्धति पर किए गए शोध को अमेरिका में आयोजित दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित नेत्र विज्ञान सम्मेलन एसोसिएशन फॉर रिसर्च इन विजन एंड ऑप्थैल्मोलॉजी (ARVO-2026) में प्रस्तुति के लिए चुना गया है। यह उपलब्धि भारतीय आयुर्वेद और स्वदेशी अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अमेरिका के डेनवर में आयोजित इस सम्मेलन में दुनिया भर के लगभग 11 हजार नेत्र विशेषज्ञों ने भाग लिया। भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए डॉ. योगेश बेंडाले इस मंच पर शोध प्रस्तुत करने वाले एकमात्र भारतीय आयुर्वेद शोधकर्ता रहे। यह अध्ययन रसायु आयुर्वेद क्लिनिक में किया गया, जिसमें डॉ. अविनाश कदम, डॉ. केतकी जगताप और डॉ. प्राजक्ता पोटे भी शोध दल का हिस्सा रहे।
डायबिटिक रेटिनोपैथी मधुमेह के कारण होने वाली ऐसी बीमारी है, जो समय पर उपचार न मिलने पर दृष्टि हानि और अंधत्व का कारण बन सकती है। वर्तमान में कई मरीजों को आंखों की रोशनी बचाने के लिए बार-बार इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं, जिससे शारीरिक पीड़ा के साथ मानसिक और आर्थिक बोझ भी बढ़ता है।
शोध में ऐसे मरीजों को शामिल किया गया, जिन्हें पहले कई इंजेक्शन दिए जा चुके थे, लेकिन अपेक्षित लाभ नहीं मिला था। उपचार के बाद ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी (OCT) जांच में रेटिना की सूजन कम होने और आंख की संरचना में सकारात्मक सुधार दर्ज किया गया। अध्ययन के अनुसार, निगरानी अवधि के दौरान लगभग 90 प्रतिशत मरीजों को दोबारा इंजेक्शन की आवश्यकता नहीं पड़ी, जबकि किसी भी मरीज में गंभीर दुष्प्रभाव नहीं पाए गए।
डॉ. योगेश बेंडाले ने कहा कि ‘तिमिरेक्स-आर’ को अमेरिका सहित कई देशों में अंतरराष्ट्रीय पेटेंट संरक्षण प्राप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि यह शोध आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है तथा भविष्य में मधुमेह के कारण दृष्टि खोने के खतरे से जूझ रहे लाखों मरीजों के लिए नई उम्मीद साबित हो सकता है।
