खूब लड़ी मर्दानी, झांसा वाली रानी..

पश्चिम बंगाल की राजनीतिक पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री की कुर्सी के पास दृढ़ मुद्रा में खड़ी एक प्रभावशाली महिला नेता, चारों ओर मीडिया कैमरे, राजनीतिक झंडे और चुनावी माहौल दिखाई देता हुआ व्यंग्यात्मक दृश्य।

ममता इस्तीफा क्यों दें ? : बंगाल राजनीति पर तीखा व्यंग्य

डॉ. मुकेश “कबीर” गीतकार एवं व्यंग्यकार, भोपाल

वैसे बैनर्जी की एनर्जी ग़लत जगह खर्च हो रही है, लेकिन फिर भी सवाल यह है कि आखिर इस्तीफा दें भी क्यों? जब उन्होंने बीजेपी को इतनी बड़ी जीत दे दी, फिर इस्तीफा क्यों दें? और ये बीजेपी वाले भी नासमझ हैं . जब आपने पूरा बंगाल ले लिया, फिर इस्तीफे के पीछे क्यों पड़े हैं? आखिर ऐसा क्या है इस्तीफे में? वो नहीं देना चाहतीं तो उनकी बात मान क्यों नहीं लेते? राजनीति में थोड़ी-बहुत ममता रहने दोगे या नहीं?

खैर, यह तो मूल और फूल का आपसी मामला है, हमें क्या! हम तो कांग्रेस की तरह स्थितप्रज्ञ हैं। हम हार-जीत, इस्तीफा और राज्याभिषेक से उतने ही दूर हैं, जितने मोह-माया से बाबा जी दूर रहते हैं।
भाई जी, मैं भौंदू बाबा टेबल वाले की बात नहीं कर रहा, जिन्हें नाशिक का आशिक कहा जाता है। मैं सच्चे बाबा की बात कर रहा हूँ, जो सच में टेबल-कुर्सी से दूर रहते हैं। आज कांग्रेस भी उसी वैराग्य को प्राप्त हो चुकी है। अकेली कांग्रेस ही है जो बंगाल के “एकला चलो रे” को चरितार्थ कर रही है, बाकी सब तो माया और ममता में उलझे हुए हैं।

खैर, ममता इस्तीफा नहीं दे रहीं, जबकि वो हार चुकी हैं। आखिर उन्हें कब समझ आएगा कि हारने वाले को कुर्सी छोड़नी ही पड़ती है, जैसे पेड़ गिरते ही बंदर डाली छोड़ देता है। अब ममता का राज्याभिषेक नहीं होने वाला, क्योंकि राज्याभिषेक बीजेपी का होगा। ममता का सिर्फ अभिषेक होगा .वो भी कुछ दिनों के लिए। बाद में अभिषेक भी बीजेपी का हो जाएगा, क्योंकि यही राजनीति का पहला नियम है कि हारी हुई पार्टी को नेता उतनी ही जल्दी छोड़ देता है, जितनी जल्दी बिल में पानी घुसते ही साँप बिल छोड़ता है।

खैर, मूल बात यह है कि ममता इस्तीफा नहीं देंगी। वो शायद खुद को झाँसी वाली रानी समझ रही हैं, तभी बोल रही हैं . “मैं अपना इस्तीफा नहीं दूँगी।” लेकिन ममता को समझना पड़ेगा कि वो झाँसी वाली नहीं, बल्कि झाँसा वाली हैं। इसीलिए बंगाल को अभी भी मुख्यमंत्री होने का झाँसा देना चाहती हैं। लेकिन अब तो खेला हो चुका, अब तो झाँसा चलबे ना…

लेकिन दिक्कत बीजेपी में भी कम नहीं है। उनको भी हमेशा की तरह मुख्यमंत्री का टोटा पड़ रहा है। उनका फिर वही शाश्वत सवाल — “कौन बनेगा मुख्यमंत्री?” क्योंकि उनकी परंपरा है कि चुनाव में जिसका नाम आगे किया जाता है, उसे मुख्यमंत्री बनाने में पीछे कर दिया जाता है, और ऐसे नए आदमी को मुख्यमंत्री बनाया जाता है जिसे खुद भी शपथ वाले दिन ही पता चलता है।

अब देखते हैं ममता की जगह किसको मिलती है, लेकिन तब तक मूल बात यही है कि ममता इस्तीफा नहीं देंगी। आखिर दें भी क्यों? इस्तीफा देने की तो कोई बात हुई ही नहीं थी, वोट देने की बात थी .वो तो जनता ने दिया नहीं, फिर काहे का इस्तीफा?

और जिस बंगाल पर टीएमसी ने अपनी ममता लुटा दी, जिस बंगाल को ममता ने “खून से सींचा” (बीजेपी वोटरों के), उसी बंगाल ने ममता को सत्ता से बाहर कर दिया। फिर इतना गुस्सा करने का हक तो बनता ही है। और वैसे भी वो बंगाल की शेरनी हैं, ढेरनी नहीं, जो इतनी आसानी से बंगाल छोड़ दें।

आखिर उन्होंने बीस साल तक बंगाल की सेवा की है। अब आगे भी बंगाल की सेवा करना चाहती हैं तो लोगों का पेट क्यों दुख रहा है? बड़े आए इस्तीफा लेने! अब जाओ उसी बीजेपी से इस्तीफा लेना, जिसको वोट दिया है। बीजेपी से फ्री राशन लोगे, फ्री मकान लोगे, फ्री के तीन हजार महीना लोगे, फिर इस्तीफा भी उन्हीं से लो न!

अब दीदी को तुमने कुछ देने लायक छोड़ा ही कहाँ है? लेकिन फिर भी हमारी आदत पड़ी है दीदी से ही माँगने की। मगर अब यह आदत छोड़ दो। अब दीदी कुछ नहीं देने वालीं। और याद रखो .वो दीदी हैं, संघर्ष की मिसाल। वो अड़ना भी जानती हैं और लड़ना भी। वो इस्तीफा नहीं देंगी मतलब नहीं देंगी।

इसलिए आज तुम भले ही कुछ भी कहो, लेकिन कल उनका इतिहास चीख-चीखकर कहेगा –
“खूब लड़ी मर्दानी, वो तो झाँसा वाली रानी थी…”

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3 thoughts on “खूब लड़ी मर्दानी, झांसा वाली रानी..

  1. कबीर जी आपका यह व्यंग्य राजनीतिक विद्रूपताओं का एक आईना है। इसमें जहाँ एक ओर सत्ता की ललक पर प्रहार है, वहीं दूसरी ओर जनता की बदलती निष्ठाओं और राजनीतिक दलों की आंतरिक कलह को भी हास्य के पुट के साथ परोसा है।
    एक जागरूक और सजग व्यंग्यकार के रूप में मुकेश ‘कबीर’ जी ने सत्ता, विपक्ष और जनता—तीनों को अपने निशाने पर लिया है।

    1. हार्दिक आभार मुक्ति जी, आपने व्यंग्य के मर्म को समझकर सटीक प्रतिक्रिया दी, यह मेरे लिए उत्साहवर्धक है और
      एक उपलब्धि जैसी है l हार्दिक धन्यवाद…

  2. Looks like politics in Bengal has turned into a full-on drama show, resignation or not, the plot twist is keeping everyone hooked! 🎭

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