पश्चिम बंगाल की राजनीतिक पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री की कुर्सी के पास दृढ़ मुद्रा में खड़ी एक प्रभावशाली महिला नेता, चारों ओर मीडिया कैमरे, राजनीतिक झंडे और चुनावी माहौल दिखाई देता हुआ व्यंग्यात्मक दृश्य।

खूब लड़ी मर्दानी, झांसा वाली रानी..

बंगाल की राजनीति पर आधारित यह व्यंग्य सत्ता, हार-जीत, इस्तीफे और राजनीतिक नाटकों की विडंबना को हास्य और तंज के माध्यम से बेहद रोचक अंदाज़ में प्रस्तुत करता है।

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झुकी हुई रीढ़ के प्रतीक के रूप में लोकतंत्र, चुनावी रैली, भीड़ और मंच पर खड़े नेता का व्यंग्यात्मक दृश्य

लोकतंत्र की झुकी हुई रीढ़

लोकतंत्र आज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ उसकी रीढ़ भीड़ और दिखावे के बोझ तले झुकती नजर आती है। चुनावी रैलियाँ संवाद नहीं, शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बन गई हैं, जहाँ नागरिकों को गिना जाता है, समझा नहीं जाता। जनकल्याणकारी योजनाएँ अधिकार नहीं, बल्कि चुनावी उपहार की तरह परोसी जा रही हैं। इस पूरे परिदृश्य में मतदाता धीरे-धीरे ग्राहक में बदलता जा रहा है। फिर भी उम्मीद कायम है जब जनता सवाल पूछती है और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होती है, तभी लोकतंत्र की झुकी हुई रीढ़ फिर से सीधी होने लगती है।

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किसको ढोओगे

यह कविता सत्ता के अहंकार, चुनावी राजनीति और सामाजिक विभाजन पर तीखे सवाल खड़े करती है। “किसको ढोओगे” आम जनता की आवाज़ बनकर लोकतंत्र के मूल्यों की याद दिलाती है।

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सागर सा वजूद

समुद्र की तरह व्यापक है हमारा वजूद, बस ज़रूरत है उसमें छिपे मोतियों को पहचानने की। जिसकी तलाश में हम दुनिया भर भटकते हैं, वह ख़ुद हमारे भीतर ही छिपा होता है सुकून भी, ख़ुदा भी। भटकते-भागते जीवन में कभी-कभी घर लौटकर देखना चाहिए, शायद वही ठहराव का असली स्थान हो। मन उदास हो तो आकाश की तरफ देखो—वही विशालता दिल को हल्का कर देती है। हार से पहले हार मत मानो; अवसर लौट-लौट कर आते हैं।

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संविधान: अधिकारों की आज़ादी या प्रतिबंधों की जकड़न?

26 नवम्बर का दिन हमारे लोकतंत्र के इतिहास में विशेष महत्व रखता है। इसी दिन 1949 में भारतीय संविधान को अंगीकार किया गया था। किताबों में हमने पढ़ा कि यह संविधान हमें मौलिक अधिकार देता है. बोलने की स्वतंत्रता, जीने का अधिकार, धर्म मानने की आज़ादी, समानता का अधिकार और भी बहुत कुछ। लेकिन जैसे-जैसे जीवन को समझा और समाज को करीब से जाना, महसूस हुआ कि किताबों और असल ज़िंदगी के बीच एक खाई है।

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मतदाता जागरुकता के लिए कांग्रेस ने निकाली प्रभात फेरी

महिदपुर विधानसभा क्षेत्र के महिदपुर रोड में गुरुवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा मतदाता जागरूकता अभियान के अंतर्गत प्रभात फेरी निकाली गई. इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने लोगों से अपने नाम मतदाता सूची में जुड़वाने और मतदान के प्रति सजग रहने का आह्वान किया. कार्यक्रम का नेतृत्व विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेश परमार और महिदपुर विधानसभा के विधायक दिनेशचंद्र बोस ने किया.

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