“मुझे मिल गया मन का मीत”

एक भारतीय महिला शांत भाव से आकाश की ओर देखती हुई, चेहरे पर प्रेम और संतोष की चमक, आध्यात्मिक मिलन और आंतरिक खुशी का प्रतीक

डॉ. संजुला सिंह “संजू” जमशेदपुर

मुझे मिल गया मन का मीत,
बजे मेरे दिल में सदा संगीत,
दुनिया क्या जाने,
दुनिया क्या जाने।

वर्षों से जिसे ढूंढ रही थी,
कर रही कीर्तन गली-गली थी,
वो आज है पकड़े हाथ,
जो देगा हरदम मेरा साथ।

दुनिया क्या जाने,
दुनिया क्या जाने।

खुश होकर दिल झूम रहा है,
नभ को जैसे चूम रहा है,
जिस घड़ी का था इंतजार,
वो मेरा सपना हुआ साकार।

दुनिया क्या जाने,
दुनिया क्या जाने।

मीत बनाया रब को मैंने,
किया समर्पण खुद को मैंने,
अब टूटे सब माया के जाल,
हो गए हम तो मालामाल।

दुनिया क्या जाने,
दुनिया क्या जाने।

मीत बनाया जबसे तुमको,
मिल गई खुशियाँ सारी हमको,
वर्षों से था दिल बेकरार,
किया आज तुमने मुझे स्वीकार।

दुनिया क्या जाने,
दुनिया क्या जाने।

मुझे मिल गया मन का मीत,
खुशी के गाऊँ मैं हरदम गीत,
दुनिया क्या जाने,
दुनिया क्या जाने।

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