अजनबी सांवरे से संवाद करती भावनात्मक हिंदी कविता, जिसमें प्रेम, भक्ति और मन की खोज का काव्यात्मक चित्रण है।

ऐ अजनबी सांवरे

यह कविता प्रेम, पहचान और आत्मिक संवाद की कोमल अभिव्यक्ति है। ‘अजनबी’ और ‘सांवरे’ के प्रतीकों के माध्यम से कवि मन की उस यात्रा को शब्द देता है, जहाँ नादानी, तलाश और समर्पण एक-दूसरे में घुल जाते हैं। प्रेम यहाँ केवल सांसारिक नहीं, बल्कि भक्ति और आत्मा का स्वर बन जाता है। मन की भटकन, चित की चोरी और ऋतु प्रीत की सुगंध के साथ यह रचना पाठक को भीतर तक छूती है और उसे अपने ही भावलोक में ले जाती है।

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मीरा के नाम ख़त

मीरा के जीवन और भक्ति को याद करते हुए लेखिका अपने भीतर उठते असंख्य प्रश्नों से जूझती है। बिना देखे कृष्ण पर किया गया अटूट विश्वास, सांसारिक सुखों का त्याग और विषम परिस्थितियों में भी स्वयं को अक्षुण्ण रखना मीरा की भक्ति आज भी मन को विस्मित और प्रेरित करती है।

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प्रेम में…

प्रेम जब आया, तो स्त्री न केवल पत्नी रही, न प्रेयसी वह मां बन गई, धारण करने वाली, संभालने वाली। पुरुष भी न प्रेमी बन सका, न पूरा आदमी; वह तो जैसे शिशु हो गया, स्नेह और सहारे पर टिका हुआ। प्रेम ने पशु से भी पशुत्व छीन लिया और वह संत-सा शांत और सहज हो उठा। तब लगा, प्रेम कोई साधारण भाव नहीं यह क्रांति है,

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आधे गीत , अधूरा जीवन

यह कविता कृष्ण और राधा के अधूरे मिलन और आधे गीत की पीड़ा को व्यक्त करती है। कवि अपने मन में बंसी की तान सुनते हुए राधा जैसा जीवन जीने की चाहत व्यक्त करता है। अधूरी आकांक्षाएँ, जंजीरों को तोड़कर आज़ादी पाने की तड़प, और पुनर्जन्म में फिर से कृष्ण को देखने की प्रार्थना कविता के भावों को गहरा और मार्मिक बनाती है। यह कविता प्रेम, विरह और आधे जीवन की अधूरी तृप्ति को दर्शाती है।

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