
डॉ. रुपाली गर्ग, मुंबई
किताबों की खुशबू में बसता है एक संसार,
जहाँ शब्द नहीं, भावनाएँ करती हैं प्यार ,
हर पन्ना जैसे दिल की कोई धड़कन हो,
हर अक्षर जैसे जीवन का दर्पण हो।
साहित्य…
सिर्फ लिखे हुए शब्दों का नाम नहीं,
ये तो आत्मा की आवाज़ है,
जो हर युग में, हर मन में
अपनी पहचान बनाती है।
कभी तुलसी की भक्ति बनकर,
कभी कबीर की सच्चाई,
कभी मीरा की प्रेम-धारा,
तो कभी प्रेमचंद की गहराई।
ये वही दीप है जो अंधेरों में जलता है,
टूटे मन को फिर से संभालता है,
जब दुनिया सवालों में उलझा दे,
साहित्य ही उत्तर बनकर निकलता है।
किताबों से रिश्ता निभाइए,
शब्दों में छुपे उस सागर को
अपने भीतर तक समाइए।
क्योंकि…
साहित्य ही वो धरोहर है
जो समय से भी आगे जाता है,
और इंसान को इंसान बनने का
सच्चा अर्थ सिखाता है।
