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कन्यादान

लाल जोड़े में सजी एक भारतीय दुल्हन विदाई के समय आँसुओं से भरी आँखों के साथ पीछे की ओर चावल फेंकती हुई दिख रही है, पास में खड़े माता-पिता भावुक हैं और शादी का सजा हुआ मंडप पृष्ठभूमि में दिखाई दे रहा है।

शादी के शोर में छिपा एक बेटी का दर्द भरा सच

श्वेता सिंह, मुंबई

बहुत खूबसूरत समा हो रहा था,
बादलों में रंगों का धुआँ हो रहा था।

माँ का हाथ पकड़कर वो आ रही थी,
मुझे देखकर थोड़ा शर्मा रही थी।

मेरे यार-दोस्त खड़े थे साथ मेरे,
वो अपनी सहेलियों में मुस्कुरा रही थी।

हाथों में पकड़ी थी उसने वरमाला,
बड़ी धीमी चाल से वो आ रही थी।

वो लाल जोड़े में सजी आ रही है,
माथे पे बिंदिया, होठों पे लाली।
हाथों में मेहंदी, हाथों में चूड़ी,
पाँवों में पायल गजब ढा रही है।

जब प्यार से थामा था हाथ मेरा,
अब ज़िंदगी में कुछ नई सी लहर आ रही है।

माँ-बाप दोनों खड़े थे मेरे पीछे,
उनके ही आशीर्वाद की झड़ी छा रही है।
माँ सोच में खड़ी मेरे पीछे,
जैसे उनकी ही परछाई बहू लक्ष्मी-आरती है।

ये शोर-गुल, ये ताशे, ये ढोल,
मानो मेरी शादी में खुश हो रहे हैं।
पटाखे थे या पटाखे बज रहे थे,
इन्हीं शोर-गुल में हम दोनों हँस रहे हैं।

मंडप में मैं आई,
ना पापा, ना मम्मी, ना भाई, ना बहन
कोई मुझे नहीं दिख रहे हैं।

थोड़ी देर में एक सज्जन सा आया,
मेरे माँ-बाप के सामने मुझे बगल में बिठाया।

यही वजह थी उस वरमाला की,
जो वर्षों के रिश्तों को पल में भुलाया।
अब बारी आई थी कन्यादान की,
वही मेरे माँ-बाप की पहचान थी।

सिंदूर पड़ते ही माँग में बड़ी हो गई मैं,
अब किसी के कुल की रानी हो गई मैं।
अब न आएगी गुड़िया ये तेरी,
रो-रो के मम्मी से ये कह गई मैं।

सिंदूर… डिबिया में होता है,
दिखता थोड़ा,
भार बहुत है इसका,
ना जानो इसको थोड़ा।

अब आई सात वचनों की बारी,
पहले तुम्हारी, फिर बारी हमारी।
मंगल गीत सबने थे गाए,
किसी को दी गाली, किसी को हँस के सुनाए।

वही कैमरामैन दौड़े आगे-पीछे,
कहीं कुछ छूट न जाए झट से वो खर्चे।
अभी तक थी अधूरी, पूरी हुई हूँ तुमसे,
नए जीवन की रागिनी हो जैसे।

अब ये सोचकर मन घबरा रहा है,
माँ-बाप, भाई-बहन को देखकर रोना आ रहा है।
माँ चुपचाप आँचल में चावल
कुछ इस तरह से भरती जा रही है,
अपनी आँखों से जैसे कुछ कहती जा रही है

ये चावल नहीं है इज्ज़त हमारी,
कभी इसको गिरने न देना बिटिया हमारी।

गाँठ बंधी है, बंधी ही रहेगी,
तभी तो रहेगी जोड़ी सलामत तुम्हारी,
तभी तो रहेगी जोड़ी सलामत तुम्हारी।

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