लाल जोड़े में सजी एक भारतीय दुल्हन विदाई के समय आँसुओं से भरी आँखों के साथ पीछे की ओर चावल फेंकती हुई दिख रही है, पास में खड़े माता-पिता भावुक हैं और शादी का सजा हुआ मंडप पृष्ठभूमि में दिखाई दे रहा है।

कन्यादान

यह भावनात्मक कविता एक दुल्हन के विवाह के हर पल को जीवंत करती है शर्माती मुस्कान से लेकर विदाई के आँसुओं तक। इसमें माँ-बाप से बिछड़ने का दर्द, नए जीवन की शुरुआत और रिश्तों की गहराई को बेहद मार्मिक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

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