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अब क्या होगा -3

एक महिला रात में टीवी देखते हुए अतीत की यादों में खोई हुई है, उसके चेहरे पर हैरानी और भावनात्मक तनाव साफ दिखाई दे रहा है।

एक सस्पेंस और इमोशनल हिंदी कहानी

रीता मिश्रा तिवारी भागलपुर

लाइट ऑन करने पर देखा तो दरवाजे पर गिरी पड़ी थी शेफाली..!
आवाज़ लगाई पर कोई हरकत नहीं। पानी का छींटा मारा..!
” क्या कर रही पागल हो गई है..जगा दिया कितना प्यारा सपना देख रही थी”
हड़बड़ा कर उठ बैठी शेफाली।

“थैंक गॉड मेरी तो जान ही निकल गई थी। ठीक तो हो..?
दरवाजे पर..! जमीन…”

“अरे यार नींद में चलने की बीमारी है शायद मां कहती है।”
रीता को सब समझ आ गया था। अब वो मुस्कुरा रही थी।

देखते देखते साल बीत गया परिक्षा पास कर मास्टर डिग्री का क्लास चालू हो गया।

मोबाइल के बजने से यादों की दुनिया से शेफाली बाहर आई…”बाप रे सुबह हो गई”..! मोबाइल देखा तो रीता का कॉल था..
“शादी की सालगिरह मुबारक हो दोस्त। आज का प्रोग्राम क्या है बता ज़रा..?” रीता चहक कर बोली।

“थैंक्स अ लॉट डियर..। रोहन टूर पे गया है, रात को आने वाला था तूफान के कारण फंसा है बेचारा..! मौसम तो अभी सुधरा है कुछ.. देखो आ गया तो… बताती हूं ।और तू बता सब बढ़िया।”

गोलू लंच बॉक्स के लिए नहीं बोलता तो दोनों सहेली का गप्प जारी रहता।

आते ही रोहन ने शेफाली को प्यार किया और कहा..
“उदास मत हो जानेजां एनिवर्सरी कल सेलिब्रेट करेंते हैं होटल ताज में क्या कहती हो..?”

“जैसी आपकी इच्छा आपकी खुशी में मेरी खुशी “

“और मेरी तुम्हारी खुशी में ” थोड़ा प्यार मुहब्बत आलिंगन किया गुड नाईट कह सो गया।

शेफाली को रोहन बहुत प्यार करता है।बेटे गोलू पर तो जान छिड़कता है। वैसे गोलू उसका बेटा नहीं है। शादी के एक साल बाद ही शेफाली का एक्सिडेंट होने से उसका होनेवाला उसका बच्चा खराब हो गया था। डॉक्टर के कहेनुसार कभी मां न बन पाने के कारण घरवालों के कहने पर पालना गृह से तीन साल के गोलू को गोद लिया था। गोलमटोल सुंदर नीली आँखें इसलिए रोहन ने उसका नाम गोलू रखा।

“तैयार रहना और हां बचपन का मेरा एक घनिष्ट मित्र है वो भी आएगा। आजकल यहीं ट्रांसफर लेकर आया है मेरा बॉस बनकर ह ह ह ” ऑफिस जाते_जाते शेफाली से रोहन कह गया।

काम निपटा कर TV खोलकर बैठ गई शेफाली पिक्चर में एक सीन देखा तो अतीत का एक और पन्ना सामने खुला देखा…

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अब क्या होगा…?

लेखिका के बारे में-

रीता मिश्रा तिवारी
हिंदी साहित्य जगत की एक सशक्त और संवेदनशील रचनाकार हैं, जिनका जन्म 12 दिसंबर 1967 को बिहार के भागलपुर में हुआ। शिक्षिका के रूप में दीर्घकालीन सेवा के पश्चात आज वे सेवा निवृत्त होकर पूर्णतः साहित्य सृजन में समर्पित हैं। एम.ए. एवं बी.एड. शिक्षित रीता जी ने ज्ञान और संस्कारों का दीप जलाते हुए समाज में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। कविता, कहानी, लघुकथा, हाइकु, संस्मरण और आलेख जैसी विविध विधाओं में उनकी लेखनी समान रूप से सशक्त और प्रभावशाली है। उनकी रचनाओं में जीवन की संवेदनाएँ, समाज की सच्चाइयाँ और मानवीय भावनाओं की गहराई स्पष्ट झलकती है। आकाशवाणी भागलपुर से उनके काव्य एवं कथा पाठ का नियमित प्रसारण उनकी साहित्यिक सक्रियता का प्रमाण है। उनकी प्रमुख कृतियों में “अविता” (एकल कहानी संग्रह) और “प्रेम लौटता है” (एकल काव्य संग्रह) विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इसके अतिरिक्त वे अनेक प्रतिष्ठित साझा काव्य एवं कहानी संकलनों का हिस्सा रही हैं। देश-विदेश की पत्र-पत्रिकाओं और ई-पत्रिकाओं में उनकी 300 से अधिक रचनाएँ प्रकाशित होकर पाठकों के बीच सराही जा चुकी हैं। रीता मिश्रा तिवारी के लिए साहित्य केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज का सजीव दर्पण है, जिसमें जीवन के अनछुए पल, अनुभव और यथार्थ सजीव हो उठते हैं। उनकी लेखनी न केवल विचारों को झकझोरती है, बल्कि पाठकों के हृदय को भी गहराई से स्पर्श करती है।

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