दुख में जो साथ दे

सच्ची दोस्ती की पहचान

डॉ. रुपाली गर्ग, मुंबई

दोस्ती कोई खेल नहीं, ये जीवन की डोर है,
दिल से दिल तक पहुँचने वाला अनमोल रिश्ता और है।

इसकी परख नहीं होती चाय की महफ़िलों में,
ये तो सामने आती है आँधियों और मुश्किलों में।

सुख में तो हर कोई मुस्कान के संग खड़ा हो जाता है,
पर दुख की घड़ी में सच्चा दोस्त ही साथ निभाता है।

जब गिरते हैं आँसू, और दुनिया मज़ाक उड़ाती है,
तो वही दोस्त तेरा सहारा बन जाता है।

दोस्ती की परख होती है ख़ामोशी पढ़ने से,
तेरे दर्द को समझने और चुपचाप सहने से।

जो बिना कहे तेरा हाल जान ले,
तेरे टूटे सपनों को अपने सपनों सा मान ले।

समय की धूल उड़ाती है हर रिश्ते के परदे,
पर दोस्ती की कसौटी पे ही सच्चाई दिखते।

धन-दौलत का मोल नहीं, न नाम का गुमान,
दोस्ती का परखता है बस दिल का ईमान।

जो तेरे साथ तब भी खड़ा हो, जब दुनिया तुझे ठुकराए,
वही दोस्त है, जो तेरी तक़दीर तक बदल जाए।

दोस्ती की परख होती है वक्त के साथ,
जो निभाए हर हाल में तेरा हाथों का हाथ।

ग़लती पर डाँटे भी, मगर छोड़कर न जाए,
तू गिर भी जाए, तो सबसे पहले उठाने आए।

दोस्ती अगर सच्ची हो, तो भगवान का वरदान है,
वरना ये जीवन तो बस सूना और वीरान है।

2 thoughts on “दुख में जो साथ दे

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