
रीता मिश्रा तिवारी, भागलपुर ( बिहार)
हमरे पड़ोसी दुबे जी के यहाँ नया किरायेदार आया था। हालाँकि उन्होंने बताया नहीं। दो दिन पहले ट्रक से सामान उतरते देखा तो कामवाली से पूछने पर पता चला।
हमरी कामवाली न ऑल इंडिया रेडियो है! सब्ज़ी मार्केट में मिलीं मिसेज दुबे, तब भी नहीं बताईं। किसी-किसी को अनहद छुपाने की आदत होती है।अब हम ठहरे खुशमिजाज, सबसे मिल-जुलकर रहने वाले। अपनी बढ़ाई खुद नहीं करनी चाहिए, पर क्या करें—हम ऐसे ही हैं तो हैं।दुनिया कुछ भी कहे, हम किसी के लिए बदलने वाले नहीं। अपना जीवन भी खराब नहीं करेंगे—काहे कि चार दिन की जिंदरी है।सोचा, खुद ही चलकर मिल आते हैं। उनको भी अच्छा लगेगा। नया जगह, नए लोग—किसी को जानते नहीं हैं। काहे नहीं, हम ही शुरुआत करें!
मेल-जोल बढ़ेगा तो हमारी किटी पार्टी में सदस्य भी बढ़ेंगे, उनका भी संपर्क बढ़ेगा। कभी ज़रूरत पड़े तो पड़ोसी ही काम आता है।अरे दइया! नवविवाहित जोड़ा निकला! कोई बात नहीं, हमको थोड़े फर्क पड़ता है। अब क्या होने लगा—पकवान, चाट, पकौड़ी, हलवा… सबका आदान-प्रदान।मिसेज दुबे मन ही मन जलती-भुनती रहीं।
आज मालपुआ लेकर गए तो कोयल किरायेदारनी फोन पर बतिया रही थी। हमने सुना तो हमारा खून सूख गया, प्राण हलक में अटक गए। उल्टे पाँव हाँफते-दौड़ते घर पहुँचे।पुलिस को फोन पर सब बता दिए। मिसेज दुबे की सिट्टी-पिट्टी गुम पुलिस काहे आई है!समूचा मोहल्ला गेट पर जमा…! “यहाँ कोयल कौन है?” इंस्पेक्टर ने दुबे जी से पूछा।
“मेरी किरायेदार है, ऊपर रहती है। बात क्या है?”धड़धड़ाते हम भी पीछे-पीछे हो लिए।“हम आपको गिरफ्तार करते हैं, कोयल जी!”“किया क्या है मैंने?”“खून के इल्ज़ाम में! बताइए, लाश कहाँ है? गिरफ्तार कीजिए इन्हें!”—लेडी कांस्टेबल को आदेश दिया गया।“खून! ये क्या कह रहे हैं आप?”“अपने पति का खून किया है आपने!”“बकवास बंद कीजिए! मेरे पति टूर पर गए हैं!”
“ए, ज़्यादा चालाकी मत दिखाओ! सब सुने हैं हम। जब तुमको मालपुआ देने आए थे, फोन पर कह रही थी न—
‘पहली बार कर रहे हैं, डर लग रहा है… पता नहीं ठीक होगा या नहीं… वैसे बढ़िया से धो-धाकर काटकर गमले में ढककर रख दिए हैं…
अपने प्यार के लिए कुछ भी कर सकते हैं… बड़ा-बड़ा कुट्टी किए हैं… रसोई में…!’
अब मासूम बन रही है!” “आंटी, आप…! ये क्या किया आपने? ऐसे चोरी-छिपे कोई किसी की बात सुनता है क्या? माय गॉड! हद है आप! इंस्पेक्टर साहब, आपको विश्वास नहीं हो रहा है न…?”
तभी…
“क्या हो रहा है? पुलिस क्यों आई है?”
“थैंक गॉड, आप आ गए! देखिए न, इनका कहना है कि…”“ए मिस्टर, काम में दखल नहीं! मैडम, जल्दी बताइए-लाश कहाँ छुपा रखी है?”“ये मेरे पति हैं! इंस्पेक्टर, आपको यकीन नहीं है न—आइए… इसी गमले में कुट्टी-कुट्टी करके रखी है… देखिए!”
“मछली…!”“जी, मछली! पहली बार काटकर बनाना था। पति की फरमाइश थी… और फोन पर बात भी इन्हीं से हो रही थी।”
“काजल सही कह रही है, इंस्पेक्टर साहब। आंटी को गलतफहमी हुई और आपको परेशानी… इन सबकी ओर से माफी चाहता हूँ।”इंस्पेक्टर बोले-“मैडम, आइंदा पूरी बात सुन-समझ-देख कर ही फोन कीजिएगा।”

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