कविता, ग़ज़ल और एहसासों का उत्सव

चित्र नगरी संवाद मंच : कवियों और कलाकारों के बीच संवेदना की दीपशिखा

मुंबई से लाइव वॉयर न्यूज के लिए मधु चौधरी की खास रिपोर्ट

रविवार 7 दिसंबर 2025 को गोरेगांव स्थित केशव गोरे स्मारक ट्रस्ट के मृणालताई हॉल में चित्र नगरी संवाद मंच द्वारा साहित्य और संवेदना से संजोया कार्यक्रम आयोजित किया गया मुंबई के कई प्रतिष्ठित साहित्यकारों और कलाकारों ने अपनी उपस्थिति से इस शाम को नवाजा.
कार्यक्रम की शुरुआत में देवमणि पांडे ने कहा कि “चित्र नगरी संवाद मंच हम सभी का मंच है हम सभी के लिए, यहां सब एक दूसरे का साथ देते हुए आगे बढ़ना चाहते हैं.” अभिनेत्री आशिमा भट्ट के स्वास्थ्य में सुधार की जानकारी भी उन्होंने साझा की एवं मंच के साथियों को मुश्किल वक्त में उनके साथ खड़े रहने की भावना की खुले दिल से सराहना की.


सकारात्मक और नकारात्मकता पर गूंजी विचारों की अनोखी बहस
कार्यक्रम की पहले सत्र में सकारात्मक और नकारात्मकता विषय पर गहन परिचर्चा हुई. सुभाष काबरा जी ने विषय पर प्रस्तावना रखते हुए रोचक पात्रों सकार भाई-नकार भाई के माध्यम से अपने विचार सभी के साथ साझा किया और सरकार से व्यंगात्मक अपील करते हुए कहा कि “नकारात्मकता को राष्ट्रीय बीमारी घोषित कर देना चाहिए.” चर्चा को आगे बढ़ाते हुए संजय सिंह ने सुकरात के किस्से के माध्यम से अपनी बात रखी. सुप्रसिद्ध शायरा दीप्ति मिश्रा ने “कहा गलत शब्दों का चयन भी सकारात्मक सोच को नकारात्मक बना सकता है”. डॉ रविंद्र कात्यायन ने गांधी जी के विचारों को उद्धत करते हुए कहा कि “दूसरों के बारे में गलत विचार रखना भी एक प्रकार की हिंसा है”. अनिल गौड़ का मत था कि “सृजन के क्षणों में नकारात्मकता या सकारात्मक का द्वंद नहीं होना चाहिए”. वही नाज़नीन जी ने थॉमस एडिसन और प्रतिमा ने जापानी बच्चों की कहानी के माध्यम से सकारात्मक की ताकत का संदेश दिया कवयित्री एवं पत्रकार रेणु ने अपने निजी अनुभवों से चर्चा को नया आयाम दिया .


धरोहर हिंदी के कालजयी कवियों को समर्पित रहा
प्रज्ञा मिश्रा ने जसवंत केरकट्टा की दो कविताओं का अत्यंत प्रभावशाली स्वर में पाठ किया. डॉ.मधुबाला शुक्ल ने निर्मला पुतुल की चर्चित कविता “इतनी दूर मत ब्याहना बाबा…” का पाठ कर माहौल को भावुक कर दिया अंकना जोशी ने मंगलेश डबराल की कविता “वह स्त्री” का पाठ किया. मधु चौधरी ने सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता “व्यंग मत बोलो”… सुना कर वर्तमान समय पर चोट की .इस शाम को और भी खास बनाया लखनऊ से आए प्रतिष्ठित शायर मंजर लखनवी ने अपनी गजलें और गीत पेश किया उनकी पंक्ति “बड़े बुजुर्गों की आंखों में पानी..”ने पूरे माहौल को भाव विभोर कर दिया. इस अवसर पर कवियत्री रचना शंकर की पुस्तक “एहसास के पन्ने” का विमोचन भी संपन्न हुआ जिसके कुछ अंशः उन्होंने स्वयं पढ़कर सुनाएं.
अभिनेता अरुण शेखर ने धर्मवीर भारती की कविता “प्रमध्यु गाथा” को अपने विशिष्ट नोट किया अंदाज में प्रस्तुत किया म्यूजिक कंपनी के मालिक मनजीत सिंह कोहली जी ने शेर पढ़ें “आग से खेलेंगे तो जलेंगे हाथ भी..” कार्यक्रम का समापन उदय दिवाकर पांडे ने स्वरचित चौपाइयों को अपने खास अंदाज में सुना कर किया, श्रोतागण भक्ति और साहित्य के रस में सरोबार हो गए .
देवमणि पांडे का कुशल संचालन इस पूरी शाम को एक सूत्र में पिरोने में सफल रहा. इस अवसर पर प्रोफेसर रामबक्ष फिल्म लेखक निर्देशक दिनेश लखनपाल, बहुभाषी शायर नवीन सी चतुर्वेदी, अभिनेता सोनू पाहुजा और डॉ. आर .एस .रावत ने अपनी मौजूदगी से सभा को जीवंत बनाया.

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