नारी के सम्मान से ही देवी पूजा सार्थक
नवरात्रि और दुर्गा पूजा केवल देवी की मूर्तियों की आराधना तक सीमित नहीं हैं। यदि समाज में नारी असुरक्षित है, तो देवी पूजन का वास्तविक भाव अधूरा रह जाता है। नारी सिर्फ पूजा का विषय नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकारों की अधिकारी है। उसे सुरक्षा, स्वतंत्रता और समानता मिलती है, तभी देवी की शक्ति, ज्ञान और ममता का प्रतीक सजीव होता है। भारतीय परंपरा में नारी को ‘शक्ति’ कहा गया है, और वही शक्ति घर और समाज की आधारशिला है। मंदिर में दीप जलाना आसान है, पर हर घर, गली और कार्यस्थल पर नारी को सुरक्षित और स्वतंत्र बनाना ही सच्ची भक्ति है। नवरात्रि हमें यही प्रेरणा देती है कि नारी को देवी मानने का अर्थ केवल पूजा नहीं, बल्कि उसके जीवन को सम्मानजनक और सुरक्षित बनाना है।
