Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
एक भावनात्मक दृश्य जिसमें एक व्यक्ति पीपल के पेड़ के नीचे खड़ा है, पतझड़ के पत्ते गिर रहे हैं और आसपास बदलते मौसम के साथ प्रकृति में आशा और स्मृतियों का प्रतीकात्मक चित्रण है

मौसम लौटता है ज़रूर

“मौसम लौटता है ज़रूर” एक संवेदनशील कविता है जिसमें ऋतुओं के माध्यम से प्रेम, बिछड़न और उम्मीद को बेहद खूबसूरती से व्यक्त किया गया है। यह कविता जीवन के चक्र और भावनाओं की गहराई को छूती है।

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अकेलेपन और प्रेम को दर्शाता थिएटर सीन”

नेपथ्य और रंगमंच

यह कविता जीवन को एक रंगमंच के रूप में प्रस्तुत करती है, जहां हर व्यक्ति एक किरदार निभा रहा है। कवयित्री स्वयं को मंच पर उपस्थित बताती है, जहां वह अपने भावों, पीड़ाओं और प्रेम को खुलकर जी रही है, जबकि उसका प्रिय नेपथ्य में रहकर अपने अस्तित्व को छिपाए हुए है।

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