डोर जो बंधी है
रिश्तों की उलझनों और आत्मविश्वास की तलाश के बीच झूलती यह कहानी दो बहनोंकनु और मन्नी—की है, जहाँ एक की कठोर सच्चाई दूसरी के टूटते हौसले को फिर से जोड़ने की कोशिश करती है। क्या मन्नी अपनी खोई हुई पहचान और आत्मविश्वास वापस पा सकेगी?

रिश्तों की उलझनों और आत्मविश्वास की तलाश के बीच झूलती यह कहानी दो बहनोंकनु और मन्नी—की है, जहाँ एक की कठोर सच्चाई दूसरी के टूटते हौसले को फिर से जोड़ने की कोशिश करती है। क्या मन्नी अपनी खोई हुई पहचान और आत्मविश्वास वापस पा सकेगी?
आज तुम्हारे भाल पर बिंदी बीचों-बीच सजनी चाहिए थी, पर तुमने उसे किनारे सरका दिया। यह कैसी गुस्ताख़ी? बस उसी को ठीक करने आया हूँ।”
उसने नंदिनी की बिंदी को मध्य में सजाया, और उसी क्षण उनकी साँसें थम-सी गईं।
रात को नंदिनी ने वही बिंदी आईने पर चिपकाते हुए धीमे से कहा—“अब यहाँ विराजिए निखिल जी… र हाँ, आँखें बंद रखना।”अगले दिन जब उसने निखिल का स्केच देखा, उस पर लिखा था—
“एक संपूर्ण रमणी नंदिनी।”
शायद तुम्हें लगता है… मैं मज़ाक करता हूँ, छेड़ता हूँ… पर सच्चाई ये है… मैं खुद को तुम्हारे शब्दों में सहेज कर रखता हूँ। मैं तुम्हारे दोस्त में माँ की ममता पाता हूँ, बहन की फिक्र पाता हूँ… और दिल के किसी सबसे कोमल कोने में एक ऐसी प्रेमिका का एहसास करता हूँ… जो कभी मिली नहीं, पर हमेशा पास रही।”