प्रेम का एहसास
प्रेम का पहला धुँधलका मैंने उसकी आँखों में देखा था वहाँ कोई असहज चाह नहीं, बल्कि एक ऐसी कोमलता थी जिसमें मेरा अस्तित्व अनायास घुलने लगता था। उस क्षण में प्रेम और देह, दोनों किसी पवित्र स्वीकृति की तरह एक-दूसरे में समा रहे थे।
मैंने महसूस किया था कि कुछ खोने की प्रक्रिया हम दोनों के भीतर एक साथ चल रही है अपने-अपने विश्वास, अपनी सुरक्षा, अपनी आदतें… मानो प्रेम हमें भीतर से उधेड़कर, नए रूप में बुन रहा हो।
