Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
नदी किनारे बैठे एक युवक और युवती के बीच भावनात्मक बातचीत और प्रेम का शांत दृश्य

इश्क़: पहली सांस भी, आख़िरी भी

इश्क़ पहली सांस भी और आख़िरी” एक संवेदनशील प्रेम कहानी है, जिसमें दो पात्रों के बीच संवादों के जरिए प्रेम और लगाव के अंतर को गहराई से समझाया गया है। यह कहानी बताती है कि सच्चा प्रेम स्वामित्व नहीं, बल्कि एहसास और स्वीकार्यता होता है। नदी किनारे घटित यह संवाद पाठकों को भावनात्मक रूप से जोड़ता है और प्रेम के वास्तविक अर्थ से परिचित कराता है।

Read More
मुंबई में आयोजित महिला सशक्तीकरण पर साहित्यिक कार्यक्रम का दृश्य

स्त्री : परम्परा और प्रगति की देहरी पर

मुंबई में ‘स्त्री : परम्परा और प्रगति की देहरी पर’ विषय पर आयोजित एक विशेष साहित्यिक कार्यक्रम में स्त्री जीवन के विविध आयामों पर गंभीर विमर्श किया गया। ‘बतरस : एक अनौपचारिक उपक्रम’ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता विभा रानी ने स्त्री-पुरुष असमानता, सामाजिक रूढ़ियों और आधुनिक चुनौतियों पर अपने विचार रखे।

Read More
Live Wire News लेखन प्रतियोगिता के परिणाम घोषित, 3 को प्रथम पुरस्कार

मौसमी चंद्रा, रेनू शब्द मुखर और डॉ. रत्ना माणिक ने जीता प्रथम पुरस्कार

लाइव वॉयर न्यूज लेखन प्रतियोगिता के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। मौसमी चंद्रा,रेनू
शब्द मुखर और डॉ. रत्ना माणिक ने प्रथम पुरस्कार हासिल किया, जबकि अन्य रचनाकारों को भी विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया।

Read More
निर्बल व्यक्ति को सहारा देता हुआ इंसान, मानवता और करुणा का प्रतीक दृश्य

निर्बल की तुम ढाल बनना

निर्बल की तुम ढाल बनना एक प्रेरणादायक हिंदी कविता है जो मानवता, करुणा और सहानुभूति का संदेश देती है। यह रचना हमें सिखाती है कि जो कमजोर हैं, उन्हें सहारा देना और उनके आँसू पोंछना ही सच्ची इंसानियत है।

Read More
अपने पति के नाम दर्द और अधूरे प्रेम से भरा पत्र लिखती एक भारतीय स्त्री का भावुक दृश्य

एक खत देवांश के नाम

क स्त्री का अपने पति के नाम लिखा गया यह मार्मिक पत्र उसके जीवन के उन अनकहे दर्दों को उजागर करता है, जो प्रेम की चाह, उपेक्षा और रिश्तों की खामोशी के बीच धीरे-धीरे उसे भीतर से तोड़ देते हैं।

Read More
जिंदगी के सुख-दुख, हार-जीत और जीवन दर्शन को दर्शाती प्रेरणादायक हिंदी कविता

जिंदगी का सच

हार और जीत, सुख और दुख, प्रेम और घृणा—जिंदगी इन सभी भावों का संगम है। यह कविता जीवन के इसी सत्य को सरल शब्दों में व्यक्त करती है और हमें सिखाती है कि कर्म, सरलता और परमार्थ के मार्ग पर चलकर ही जीवन के पलों को सार्थक बनाया जा सकता है।

Read More
विश्व में हिंसा और होली के विरोधाभास को दर्शाता प्रतीकात्मक दृश्य

जब रंग हुए लाल

यह कविता विश्व में फैलती हिंसा, नकली व्यवहार और टूटते मानवीय मूल्यों पर तीखा प्रश्न उठाती है। होली और रमज़ान जैसे पावन अवसरों के बीच खून-खराबे की विडंबना को उजागर करती एक मार्मिक सामाजिक रचना।

Read More
जीवन के विभिन्न भावनात्मक रंगों को दर्शाता होली का दृश्य

रंगों से सजी ज़िंदगी

विजया डालमिया, प्रसिद्ध लेखिका, हैदराबाद रंग ज़िंदगी को खूबसूरत बनाते हैं।जीवन में हर रंग अपनी अहमियत दर्ज कराने समय-समय पर चला आता है। अमूमन हम नीले, पीले, हरे और सबसे पुराने रंगगुलाबी के बारे में जानते हैं। रंग ज़िंदगी में हों या शब्दों में… वे खुद को बयां कर ही देते हैं। आइए जानते हैं,…

Read More
बाढ़ से डूबता गांव और हाथ में किताब लिए खड़ी उदास बच्ची

“झूठा गांव”

“झूठा गांव” एक भावनात्मक कहानी है जिसमें किताबों के सुंदर गांव और बाढ़ से जूझते वास्तविक गांव का अंतर दिखाया गया है। गंगा की भीषण कटान के बीच एक बच्ची के टूटते सपनों की मार्मिक प्रस्तुति पाठकों को भीतर तक झकझोर देती है।

Read More