स्वतंत्र और आत्मविश्वासी भारतीय महिला नारी अधिकार और समानता का प्रतीक बनकर खड़ी

मैं नारी हूँ जागीर नहीं

यह कविता नारी की स्वतंत्रता, आत्मसम्मान और अधिकारों की बुलंद आवाज़ है। समाज में स्त्री को जागीर समझने की मानसिकता पर तीखा प्रहार करती यह रचना समानता और सम्मान की माँग करती है।

Read More

सनम, तुम देना साथ मेरा

यह कविता प्रेम, विश्वास और जीवनभर साथ निभाने के संकल्प को दर्शाती है। भारतीय सांस्कृतिक संदर्भों में रची यह रचना स्त्री के समर्पण, स्नेह और भावनात्मक सुरक्षा की आकांक्षा को कोमल शब्दों में व्यक्त करती है।

Read More
जनवरी की धूप में चाय पीते हुए आत्मचिंतन करती महिला, सर्दी और मानवीय संवेदना का दृश्य

धूप, चाय और करुणा: जनवरी की सीख

“मेरी प्यारी जनवरी” एक आत्मीय और भावुक गद्य है, जिसमें सर्दियों की ठंड, धूप की मिठास, नए संकल्पों की शुरुआत और समाज के वंचित वर्ग के प्रति संवेदना को बेहद सहज शब्दों में पिरोया गया है।

Read More
कल्पकथा साहित्य संस्था द्वारा नागपुर की मेघा अग्रवाल और उनकी पुत्री मिहूं अग्रवाल को कल्प भेंटवार्ता पत्रम से सम्मानित करते हुए

एक मंच, दो पीढ़ियाँ और साहित्य की साझा विरासत

नागपुर की साहित्यकार मेघा अग्रवाल और उनकी पुत्री मिहूं अग्रवाल को कल्पकथा साहित्य संस्था द्वारा एक साथ सम्मानित किया गया। “दो पीढ़ियाँ एक साथ” कार्यक्रम में माँ-पुत्री की यह साहित्यिक यात्रा दर्शकों के लिए प्रेरणा बनी।

Read More
गणतंत्र दिवस पर आर. के. कॉलेज मालाड में आयोजित कथा-कथन कार्यक्रम में साहित्यकार कहानी पाठ करते हुए।

गणतंत्र दिवस पर “कथा-कथन” कार्यक्रम संपन्न

गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित कथा-कथन कार्यक्रम में साहित्य, संवेदना और सामाजिक सरोकारों की प्रभावशाली प्रस्तुति देखने को मिली।

Read More
अजनबी सांवरे से संवाद करती भावनात्मक हिंदी कविता, जिसमें प्रेम, भक्ति और मन की खोज का काव्यात्मक चित्रण है।

ऐ अजनबी सांवरे

यह कविता प्रेम, पहचान और आत्मिक संवाद की कोमल अभिव्यक्ति है। ‘अजनबी’ और ‘सांवरे’ के प्रतीकों के माध्यम से कवि मन की उस यात्रा को शब्द देता है, जहाँ नादानी, तलाश और समर्पण एक-दूसरे में घुल जाते हैं। प्रेम यहाँ केवल सांसारिक नहीं, बल्कि भक्ति और आत्मा का स्वर बन जाता है। मन की भटकन, चित की चोरी और ऋतु प्रीत की सुगंध के साथ यह रचना पाठक को भीतर तक छूती है और उसे अपने ही भावलोक में ले जाती है।

Read More
इंडिया इंटरनेशनल सेंटर नई दिल्ली में ‘मजबूती का नाम महात्मा गांधी’ पुस्तक के लोकार्पण समारोह में मंच पर लेखक पुरुषोत्तम अग्रवाल, वक्ता अशोक वाजपेयी और उपस्थित साहित्य प्रेमी

‘मजबूती का नाम महात्मा गांधी’ का लोकार्पण

इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में पुरुषोत्तम अग्रवाल की पुस्तक ‘मजबूती का नाम महात्मा गांधी’ का लोकार्पण हुआ। अशोक वाजपेयी ने इसे गांधी-निंदा अभियानों को चुनौती बताया, वहीं राजमोहन गांधी ने देश में फैलाए जा रहे झूठों पर चिंता जताई।

Read More
कभी-कभी कोई दर्दनाक घटना सुनने भर से ही दिल काँप जाता है। पर जब ऐसा पता चलता है कि वह दर्द किसी ऐसे इंसान के साथ हुआ है जिसे हम रोज़ देखते थे, जिसके बच्चे हमारे सामने खेलते थे,

काली राख की बस्ती

कभी-कभी कोई दर्दनाक घटना सुनने भर से ही दिल काँप जाता है। पर जब ऐसा पता चलता है कि वह दर्द किसी ऐसे इंसान के साथ हुआ है जिसे हम रोज़ देखते थे, जिसके बच्चे हमारे सामने खेलते थे,

Read More
बेटी की सफलता और माँ के समर्थन को दर्शाती प्रेरणादायक लघुकथा का दृश्य

सौ सुनार की, एक लोहार की

सौ सुनार की, एक लोहार की!” एक प्रेरणादायक लघुकथा है, जिसमें एक माँ अपनी बेटी के सपनों के साथ खड़ी होती है और बेटी अपनी मेहनत से समाज की सोच को करारा जवाब देती है।

Read More