डॉ. संजुला सिंह ‘संजू’ को ‘मातृभाषा रत्न’ से सम्मानित
जमशेदपुर की साहित्यकार डॉ. संजुला सिंह ‘संजू’ को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर शब्द प्रतिभा फाउंडेशन नेपाल द्वारा “मातृभाषा रत्न” मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।

जमशेदपुर की साहित्यकार डॉ. संजुला सिंह ‘संजू’ को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर शब्द प्रतिभा फाउंडेशन नेपाल द्वारा “मातृभाषा रत्न” मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
‘माँ तेरा आँचल’ कविता माँ के स्नेह, ममता और सुरक्षा के उस भावलोक को चित्रित करती है जहाँ आँचल ही संसार बन जाता है। यह रचना बचपन की स्मृतियों और मातृत्व की गरिमा को सरल शब्दों में जीवंत कर देती है।
“हिंदी महीनों के नाम” एक सुंदर और शिक्षाप्रद बाल कविता है, जो चैत्र से फाल्गुन तक भारतीय पंचांग के बारह महीनों का सरल और रोचक परिचय देती है। प्रत्येक महीने को उससे जुड़े मौसम और प्रमुख त्योहारों के माध्यम से बच्चों के लिए यादगार बनाया गया है। यह कविता ज्ञान और संस्कृति का सुंदर संगम प्रस्तुत करती है।
उनके पर्स के किसी कोने में मेरा दिल रखा है—मेकअप की चीज़ों से घिरा हुआ। दिल कभी शिकायत करता है, कभी जिद करता है कि उसे वहीं रहने दो। वजह बड़ी मासूम है जब भी वह पर्स खोलती हैं, उनकी उँगलियों का स्पर्श दिल को ऐसा सुकून देता है कि सारी चुभन भूल जाती है। दिल मानता है कि सबसे महफ़ूज़ और मीठी जगह वही है, जहाँ अहसास बिना बोले छू लेते हैं।
यह कविता नारी की स्वतंत्रता, आत्मसम्मान और अधिकारों की बुलंद आवाज़ है। समाज में स्त्री को जागीर समझने की मानसिकता पर तीखा प्रहार करती यह रचना समानता और सम्मान की माँग करती है।
यह कविता प्रेम, विश्वास और जीवनभर साथ निभाने के संकल्प को दर्शाती है। भारतीय सांस्कृतिक संदर्भों में रची यह रचना स्त्री के समर्पण, स्नेह और भावनात्मक सुरक्षा की आकांक्षा को कोमल शब्दों में व्यक्त करती है।
“मेरी प्यारी जनवरी” एक आत्मीय और भावुक गद्य है, जिसमें सर्दियों की ठंड, धूप की मिठास, नए संकल्पों की शुरुआत और समाज के वंचित वर्ग के प्रति संवेदना को बेहद सहज शब्दों में पिरोया गया है।
नागपुर की साहित्यकार मेघा अग्रवाल और उनकी पुत्री मिहूं अग्रवाल को कल्पकथा साहित्य संस्था द्वारा एक साथ सम्मानित किया गया। “दो पीढ़ियाँ एक साथ” कार्यक्रम में माँ-पुत्री की यह साहित्यिक यात्रा दर्शकों के लिए प्रेरणा बनी।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित कथा-कथन कार्यक्रम में साहित्य, संवेदना और सामाजिक सरोकारों की प्रभावशाली प्रस्तुति देखने को मिली।
यह कविता प्रेम, पहचान और आत्मिक संवाद की कोमल अभिव्यक्ति है। ‘अजनबी’ और ‘सांवरे’ के प्रतीकों के माध्यम से कवि मन की उस यात्रा को शब्द देता है, जहाँ नादानी, तलाश और समर्पण एक-दूसरे में घुल जाते हैं। प्रेम यहाँ केवल सांसारिक नहीं, बल्कि भक्ति और आत्मा का स्वर बन जाता है। मन की भटकन, चित की चोरी और ऋतु प्रीत की सुगंध के साथ यह रचना पाठक को भीतर तक छूती है और उसे अपने ही भावलोक में ले जाती है।