स्कूल यूनिफॉर्म पहने चार दोस्त कंधे से कंधा मिलाकर हँसते हुए स्कूल की ओर जाते हुए, जो बचपन की सच्ची दोस्ती और यादों का प्रतीक हैं।

दोस्त

बचपन की पाठशाला, दोस्तों के साथ बिताए सुनहरे पल, साझा टिफ़िन, इम्तिहान की शरारतें और जीवनभर साथ निभाने वाले रिश्तों की भावनाओं को समेटे यह कविता सच्ची दोस्ती का खूबसूरत चित्र प्रस्तुत करती है। यह हर उस व्यक्ति के दिल को छू जाएगी, जिसने कभी अपने स्कूल के दोस्तों को याद किया हो।

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स्कूल के दिनों के मासूम प्यार और बचपन की यादों पर आधारित भावनात्मक हिंदी कहानी

वो टिफ़िन,अचार और तुम….

हर प्रेम कहानी का अंत मिलन नहीं होता। कुछ प्रेम कहानियाँ केवल यादों में जीवित रहती हैं। अनिरुद्ध और काव्या की यह भावनात्मक कहानी बचपन की मासूम दोस्ती, अनकहे प्रेम और उन मीठी स्मृतियों को सहेजती है, जो उम्रभर दिल में मुस्कुराती रहती हैं।

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कोई लौटा दे मेरे… वो स्कूल के दिन!

पैदल स्कूल जाना, बिना ट्यूशन के पढ़ाई, सादगी भरा जीवन और माता-पिता की निश्चिंतता। सुविधाओं की कमी के बावजूद उस दौर में संतोष, आत्मनिर्भरता और खुशियों की भरपूर अनुभूति थी, जो आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में दुर्लभ हो गई है।

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विदाई गीत

आज विदाई का वह क्षण है, और मैं यहाँ अकेला खड़ा हूँ, यह सोचते हुए कि क्या कहूँ और शब्दों का सही चयन कैसे करूँ। मेरी आँखें भर आती हैं जब मैं अपने विद्यालय में पहले दिन की यादों को याद करता हूँ—वो उत्साह, वो नर्वसनेस, और दोस्तों के साथ की छोटी-छोटी शरारतें, जैसे क्लास में बंक मारना या किसी का टिफ़िन चुपके से ले जाना। वे निश्चिन्त, हँसी-खुशी भरे पल, दोस्तों के साथ की मस्ती, टीचरों को चिढ़ाना, खेल के मैदान और प्रार्थना की ध्वनि—ये सभी यादें हमेशा मेरे दिल में रहेंगी।

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