फ़र्क

एक पल में तान्या का भरोसा टूट गया और माँ दुर्गा जाग उठीं। जिस चेहरे को उसने पिता का रूप मान लिया था, वही चेहरा बच्चों की सुरक्षा पर सवाल बन गया। उस दिन उसे समझ आया—रिश्ता होना और रिश्ता दिखना, दोनों में ज़मीन-आसमान का फ़र्क होता है।

Read More

भीड़

भीड़ के बीच बैठी खून से लथपथ घबराई लड़की को युवक ने अपना कोट ओढ़ाकर उठाया, और तमाशा देखती भीड़ पर गुस्से से गरज उठा.“अगर आपकी बेटी होती, तो भी ऐसे ही खड़े रहते?”

Read More

…वजूद

कभी-कभी एक साधारण-सी बातचीत हमें किसी भूली-बिसरी सच्चाई से रूबरू करवा देती है। यह कहानी भी ऐसी ही एक स्त्री की है — एक पढ़ी-लिखी बंजारन, जो विवाह के बाद घर-परिवार और खेतों की ज़िम्मेदारियों में इस कदर उलझी कि अपने अस्तित्व का ख्याल रखना ही भूल गई। उसकी सारी सोच अपने बच्चों के भविष्य और परिवार की सेवा में समर्पित रही। हमेशा डरती रही — “मुझे कुछ हो गया तो बच्चों का क्या होगा?” और फिर वही डर सच हो गया।

उसके जाने के बाद, जिस परिवार के लिए उसने अपना सब कुछ दांव पर लगाया था, उन्होंने जल्दी ही उसका स्थान भर दिया — दूसरी शादी, आया की व्यवस्था, और जीवन फिर से पटरी पर। और आया भी, जो सबका ख्याल रखते-रखते खुद बीमार होकर चल बसी… उसके बाद भी जीवन नहीं रुका।

Read More

प्रेम की छोटी सी सल्तनत

एक छोटी-सी सल्तनत, कुछ किताबें, एक बिस्तर और दो दिल—इस कहानी में प्रेम के वे पल कैद हैं जो हँसी और आँसुओं के बीच कहीं मुकम्मल होते हैं। कभी झिझक, कभी झेंप, और एक आलिंगन—जो बरसों बाद भी उतना ही सुकून देता है जितना पहली बार।

Read More