Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
सुबह की सुनहरी रोशनी में खेतों के बीच उगता सूरज और गोद में शिशु लिए माँ की छाया, धैर्य, संयम और आशा का प्रतीक

…बस धीरज का छोर न छूटे

बस धीरज का छोर न छूटे” एक सारगर्भित हिंदी कविता है जो धैर्य, सहनशीलता और अडिग विश्वास को जीवन का सबसे बड़ा बल बताती है। प्रकृति, मातृत्व, इतिहास और भक्ति के उदाहरणों के माध्यम से यह रचना बताती है कि समय चाहे कितना भी कठिन हो, धीरज ही सफलता और शांति की कुंजी है।

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जीवन एक संगीत

जीवन एक मधुर संगीत की तरह है, जिसमें सुख और दुःख उसके स्वरों की भाँति आते-जाते रहते हैं। संयम, विश्वास और परहित की भावना से भरा यह जीवन, गीता के ज्ञान को आत्मसात कर हर भव से पार हो सकता है। जब मन ईर्ष्या और लोभ से मुक्त होकर आशा, ममता और सत्य को अपनाता है, तब जीवन स्वयं एक संगीतमय चमन बन जाता है।

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“कोमल नहीं, मजबूत है कलाई”

स्त्री केवल कोमल नहीं, बल्कि परिवार और समाज की धुरी है। संस्कार, व्रत, उपवास और साधना के माध्यम से वह न केवल अपने भीतर शक्ति और संयम विकसित करती है, बल्कि पूरे परिवार को एक सूत्र में बाँधती है। यह कविता स्त्री की आंतरिक ऊर्जा, परंपरा और सशक्तिकरण को उजागर करती है।

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