कोहरे भरे रास्ते पर खड़ा व्यक्ति दूर दिखाई देती रोशनी की ओर देखता हुआ, ईश्वर की योजना पर विश्वास और आशा का प्रतीक

कठिन रास्ते, सुंदर मंज़िलें…

“उसके प्लान पर विश्वास रखना” एक प्रेरक रचना है जो जीवन की कठिन परिस्थितियों को ईश्वर की गहरी योजना के रूप में देखने का दृष्टिकोण देती है। यह रचना सिखाती है कि असफलता, दूरी और अभाव भी हमें मज़बूत, जागरूक और कृतज्ञ बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं।

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सुबह की सुनहरी रोशनी में खेतों के बीच उगता सूरज और गोद में शिशु लिए माँ की छाया, धैर्य, संयम और आशा का प्रतीक

…बस धीरज का छोर न छूटे

बस धीरज का छोर न छूटे” एक सारगर्भित हिंदी कविता है जो धैर्य, सहनशीलता और अडिग विश्वास को जीवन का सबसे बड़ा बल बताती है। प्रकृति, मातृत्व, इतिहास और भक्ति के उदाहरणों के माध्यम से यह रचना बताती है कि समय चाहे कितना भी कठिन हो, धीरज ही सफलता और शांति की कुंजी है।

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एक टूटा हुआ काँच का गिलास और खिड़की के पास उदास मुद्रा में बैठा व्यक्ति, जीवन और रिश्तों के टूटने का प्रतीक

टूटना

यह कविता ‘टूटना’ शब्द के बहाने जीवन की उन सभी चीज़ों को छूती है, जिनका टूटना केवल भौतिक नहीं बल्कि भावनात्मक और अस्तित्वगत पीड़ा भी बन जाता है। पेंसिल की नोक से लेकर रिश्तों और विश्वास तक हर टूटन एक गहरी चुप्पी छोड़ जाती है।

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सीमाओं के भीतर उड़ान

वह किसी पोस्टर पर छपी निडर स्त्री नहीं थी. न ही हर बहस में आगे बढ़कर अपनी ताक़त साबित करने वाली कोई प्रतीकात्मक नायिका. अनन्या उन अनगिनत महिलाओं में से एक थी, जिनकी शक्ति शोर नहीं करतीवह संतुलन रचती है.

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जीवन एक संगीत

जीवन एक मधुर संगीत की तरह है, जिसमें सुख और दुःख उसके स्वरों की भाँति आते-जाते रहते हैं। संयम, विश्वास और परहित की भावना से भरा यह जीवन, गीता के ज्ञान को आत्मसात कर हर भव से पार हो सकता है। जब मन ईर्ष्या और लोभ से मुक्त होकर आशा, ममता और सत्य को अपनाता है, तब जीवन स्वयं एक संगीतमय चमन बन जाता है।

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भरोसे से भगवान मिलते हैं : पूज्य श्री सुनीलकृष्णजी व्यास

श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से परिपूर्ण वातावरण में श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस का आयोजन अत्यंत भावपूर्ण रूप से संपन्न हुआ। कथा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भजन-कीर्तन, जयघोष और हरि नाम के संकीर्तन से संपूर्ण पंडाल भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने गहन एकाग्रता और भाव-विभोर मन से कथा श्रवण का पुण्य लाभ लिया।

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काँच नहीं, अब धार हूँ

कभी किसी दिन जीवन की भाग-दौड़ से पल चुराकर मैं अपनी ही बनाई शांति में बैठूँगी। फूलों, पेड़ों और परिंदों की चहचहाहट के बीच मैं खुद को सुनूँगी और तब समझ आएगा कि सबसे बड़ा सहारा मैं स्वयं रही हूँ। टूटकर भी जिसने खुद को समेटा, वही मेरी असली पहचान है।

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मीरा के नाम ख़त

मीरा के जीवन और भक्ति को याद करते हुए लेखिका अपने भीतर उठते असंख्य प्रश्नों से जूझती है। बिना देखे कृष्ण पर किया गया अटूट विश्वास, सांसारिक सुखों का त्याग और विषम परिस्थितियों में भी स्वयं को अक्षुण्ण रखना मीरा की भक्ति आज भी मन को विस्मित और प्रेरित करती है।

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संदेह और संबंध…

संदेह हर बार अविश्वास से नहीं, बल्कि संवाद की कमी से जन्म लेता है। जब शब्द थक जाते हैं और मौन लंबा हो जाता है, तब मन कल्पनाओं से भर जाता है। पर यदि हम सच से संवाद करें, तो संदेह भी संबंध को सुधारने का अवसर बन सकता है। क्योंकि प्रेम का अर्थ अंधविश्वास नहीं, बल्कि समझ और सच्चाई में विश्वास है।

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10 रुपये की कीमत

आज़ादी के बाद के दिनों में दो घनिष्ठ मित्र थे .एक धनी, एक साधारण।
एक दिन निर्धन मित्र ने 10 रुपये उधार लिए और फिर अचानक परिवार सहित कहीं चला गया।
25 साल बाद लखनऊ के एक होटल में दोनों अचानक मिले वही साधारण मित्र अब होटल मालिक बन चुका था।उसने कहा “मैं वो 10 रुपये वापस नहीं दूँगा, क्योंकि उन्हीं 10 रुपयों ने मुझे आज ये पहचान दी है।”

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