ईश्वर पर विश्वास

संपूर्ण हृदय से प्रभु पर भरोसा रखें और अपनी बुद्धि पर निर्भर न रहें। जीवन में चाहे सुख हो या दुख, भय और चिंता को त्यागकर ईश्वर की इच्छा में चलना ही सच्चा विश्वास है। प्रार्थना और समर्पण के माध्यम से हम आंतरिक शांति, स्थिरता और संतोष प्राप्त कर सकते हैं। ईश्वर पर भरोसा केवल आध्यात्मिक अनुभव नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक शक्ति भी देता है। जब हम अपनी चिंताओं को प्रार्थना में छोड़ देते हैं, तब हमारा बोझ हल्का होता है और हम जानते हैं कि हम अकेले नहीं हैं।

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रूठे पिया

करवा चौथ की तैयारियों के बीच मन में अजीब सी उदासी थी। रवि की नाराज़गी ने त्योहार की सारी चमक जैसे बुझा दी थी। मैंने उनकी पसंद का खाना बनाकर उसमें “सॉरी” का कार्ड छुपा दिया, उम्मीद थी कि वे मुस्कुराएँगे, कॉल करेंगे — पर सन्नाटा ही जवाब बना रहा। शाम ढली तो आँसू ढलक पड़े। तभी दरवाज़े की घंटी बजी — सामने रवि थे, मुस्कराते हुए। बिना कुछ कहे उन्होंने मुझे बाँहों में भर लिया।

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करवा चौथ

साँझ के धुँधलके में जब दीपों की कतारें आँगन को सजाती हैं, हवा में करवा चौथ का सुगंधित उत्सव घुल जाता है। थाली में सिन्दूर, करवा में भरा प्यार — सब कुछ उस एक भाव के इर्द-गिर्द घूमता है जो समय की हर परीक्षा में अडिग रहा है। चाँद निकलने से पहले ही मन अपने चाँद को निहार लेता है — वही तो उसका सहारा है, वही उसका संसार। भूख-प्यास का एहसास प्रेम की ऊष्मा में कहीं विलीन हो जाता है। करवा की लौ झिलमिलाती है, जैसे रिश्तों की डोर — अटूट, पवित्र और उजली। प्रतीक्षा में बँधी आँखों में बस एक ही नाम गूंजता है, एक ही आकांक्षा साँसों में बसती है

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रिश्ते कुछ जाने कुछ अनजाने से

रिश्ते कुछ जाने-पहचाने होते हैं और कुछ अनजाने। कुछ जन्म से मिलते हैं तो कुछ समय और प्रयास से बनते हैं। ये कलियों की तरह कोमल और फूलों की तरह नाज़ुक होते हैं, लेकिन धैर्य और निभाने से लंबे समय तक टिके रहते हैं। समझ की डोर से बंधे ये रिश्ते जीवन के तूफ़ानों में भी नहीं टूटते। सुख-दुख में ये हमेशा साथ चलते हैं और एक-दूसरे को सहारा देते हैं। सच्चे रिश्ते प्रेम, समर्पण और ईमानदारी से पनपते हैं, और हर चुनौती का सामना मिलकर करते हैं। कठिनाइयों में ये हौसला बढ़ाते हैं और संघर्षों को जीत में बदल देते हैं। मन की उथल-पुथल में भी ये शांति देते हैं और आंधियों में भी अडिग खड़े रहते हैं। निराशा के क्षण आते हैं, फिर भी सच्चे रिश्ते कभी टूटते नहीं, क्योंकि इन्हें जोड़ती है भरोसे, करुणा और आपसी देखभाल की ताक़त।

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रेत से ख़्वाब आँखों में आफ़ताब

ज़िंदगी हर रोज़ रेत-सी थोड़ी-थोड़ी फिसलती जाती है, और आँखों में ख्वाब आफ़ताब की तरह जलते हैं। कामयाबियों की चर्चा तो सब करते हैं, मगर नाकामियों से जब सामना हुआ था, उसका भी कभी हिसाब देना पड़ेगा। समाज की यही रीत है कि वह चैन से जीने नहीं देता और अनचाहे सवालों के जवाब मांगता है। दूसरों की गलतियों पर उंगली उठाने वालों को पहले अपनी करतूतों की किताब खोलकर देखनी चाहिए। फकीर फकीर ही रहा, क्योंकि उसने चापलूसी नहीं की – वहीं नवाब बनते गए जो मीठी बातों में उलझे रहे। लेकिन जिसने सच कहा, वो हमेशा गलत समझा गया। फिर भी, अपने विश्वास की चाल न टूटी है, न टूटेगी।

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“रिश्तों की श्वास: विश्वास”

जिस प्रकार जीवन के लिए श्वास लेना आवश्यक है, उसी प्रकार रिश्तों को जीवित रखने के लिए विश्वास की आवश्यकता होती है। यदि रिश्तों में शक, झूठ और अवसाद जैसी अशुद्ध वायु भर जाए, तो उनका दम घुटने लगता है। ऐसे में जरूरी है कि हम स्वयं सकारात्मक रहें और अपने रिश्तों को विश्वास की स्वच्छ हवा प्रदान करें, क्योंकि इन्हें बचाने की ज़िम्मेदारी हमारी ही है – किसी और की नहीं।

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