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“यादों का लिफाफा”

इस कविता में एक संतान अपनी माँ की यादों और सीख को भावनात्मक रूप में संजोती है। माँ द्वारा दिए गए एक पुराने खत में छिपे भाव उसे आज भी संबल देते हैं। माँ की कही बातें, उसके एहसास, और उसका साथ — सब कुछ आज भी दिल की अलमारी में सजे हुए हैं। वह मानती है कि वह माँ जैसी नहीं बन सकी, लेकिन माँ से जीवन की सच्ची बातें सीखी हैं — मोहब्बत, यारी और कठिनाइयों में टूटे बिना जीना। उजालों की प्रतीक्षा में अंधेरों से जो उसने पाया, वो भी माँ की दी हुई रोशनी से ही संभव हो पाया।

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