Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

अरमान

नदी के किनारे खड़े होकर वह लंबे समय तक मटमैले पानी को निहारता रहा। हफ्तों से पानी देखने की आस थी, पर आज जब पानी सामने था तो वह विनाश का दूत बन आया था। अरमान तो बहुत थे—खेत लहलहाने के, फसल कटने की, जीवन संवरने की—पर अब सब कुछ बह चुका था। उसने भारी मन से कहा, “बहुत अरमान थे तुझे… देख ले पानी… जी भर के…”

Read More