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चुप्पी, अविश्वास और यौन उत्पीड़न पर आधारित मार्मिक हिंदी कहानी 'उलझन'

उलझन

‘उलझन’ एक संवेदनशील हिंदी कहानी है, जिसमें एक युवती अपने जीजा की गलत हरकतों का शिकार होती है। चुप्पी और गलतफ़हमी उसे अपराधी बना देती है। यह कहानी बताती है कि हर दिखाई देने वाला सच, वास्तव में सच नहीं होता और समय पर आवाज़ उठाना कितना आवश्यक है।

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जिंदगी भर नहीं भूलेगी मेट्रो की वो रात…

एक भागती-दौड़ती मुंबई की रात में, मैं मेट्रो के सफर पर थी, अपने बैग और गिफ्ट बॉक्स के साथ, साड़ी में शाही अंदाज़ लिए। एक अजनबी सज्जन ने बिना किसी शब्द के मेरी मदद की, मेरा सामान लौटाया और बाद में टिकट लेने में भी सहायता की। हमारी अनौपचारिक बातचीत, मुस्कानें और छोटे-छोटे इशारे उस रात को यादगार बना गए। सफर के बीच हमारी बातचीत इतनी सहज और हल्की थी कि समय का पता ही नहीं चला। उनके व्यवहार में न तो अश्लीलता थी, न कोई लालसा सिर्फ मित्रवतता और आदर।

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