आखिर क्यों…?
यह कहानी एक ऐसे बुज़ुर्ग व्यक्ति की त्रासदी है जिसने जीवन भर अपने परिवार के लिए सब कुछ किया, लेकिन जीवन की साँझ में अकेलापन, उपेक्षा और भूख उसके हिस्से आई। यह लेख समाज से सवाल करता है क्या पुरुष का दर्द सचमुच अदृश्य होता है?

यह कहानी एक ऐसे बुज़ुर्ग व्यक्ति की त्रासदी है जिसने जीवन भर अपने परिवार के लिए सब कुछ किया, लेकिन जीवन की साँझ में अकेलापन, उपेक्षा और भूख उसके हिस्से आई। यह लेख समाज से सवाल करता है क्या पुरुष का दर्द सचमुच अदृश्य होता है?