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स्त्री है त्रिशक्ति

स्त्री वास्तव में त्रिशक्ति का प्रतीक है—वह शारदा की ज्ञानमयी छवि है, शिवा की त्याग और साहस भरी ऊर्जा है और श्री की समृद्धि और करुणा से भरपूर है। उसका स्वरूप कभी पीपल की ठंडी छाँव-सा शीतल है तो कभी सावन की झड़ी-सा तरल और जीवनदायी। ठिठुरती सर्दियों में वह गुनगुनी धूप बन जाती है। सृष्टि की शुरुआत भी उसी से होती है और अंत भी उसी में समाया हुआ है।

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ऐ जिन्दगी

यह कविता एक आत्मीय संवाद की तरह है जिसमें जीवन से धीमे चलने की विनती की गई है। इसमें अकेलेपन, कठिन रास्तों और यादों की संगत को बहुत सहज भाव से व्यक्त किया गया है। कवयित्री कहती है कि जिन्दगी ने अपने हिस्से की धूप तो दी, पर अब वह ठंडी हवाओं और तन्हा रास्तों के बीच खुद को समेटे हुए है। बावजूद इसके, भीतर कहीं एक उम्मीद अब भी जीवित है कि शायद कोई राह ज़रूर होगी जो उसे उसके “जीवन” तक पहुँचा देगी।

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