ढूँढें माँ की छाँव
यह कविता गहन भावनाओं और स्मृतियों के माध्यम से माँ और बचपन की छाया की खोज को प्रस्तुत करती है। पहली कविता में माता की ममता और उनके बिना घर की खाली-खाली देहरी की पीड़ा व्यक्त की गई है, जबकि दूसरी कविता में बचपन की नॉस्टैल्जिया और पिता की यादें उजागर हैं। कवि ने मातृत्व, प्रेम और संवेदनशीलता के रसों के साथ भावनाओं की गहराई में जाकर वियोग, याद और आत्मचिंतन का दृश्य खींचा है।
