महाभारत सभा में द्रौपदी श्रीकृष्ण को पुकारती हुई, दुशासन चीरहरण का प्रयास करता है, दिव्य प्रकाश से अनंत वस्त्र प्रकट होते हैं और सभा मौन खड़ी है।

हे गोविंद! मेरी लाज बचाओ

द्रौपदी के चीरहरण प्रसंग पर आधारित यह मार्मिक कविता नारी सम्मान, अन्याय के विरुद्ध पुकार और श्रीकृष्ण की दिव्य रक्षा का भावपूर्ण चित्रण करती है।

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द्रौपदी–कृष्ण संवाद: “विश्वास का वस्त्र

द्रौपदी–कृष्ण संवाद

द्रौपदी और श्रीकृष्ण के बीच यह संवाद “विश्वास का वस्त्र” महाभारत की उस पीड़ा को उजागर करता है, जहाँ नारी अस्मिता पर प्रश्न उठे। यह रचना विश्वास, धर्म, और नारी सम्मान के गहरे अर्थ को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करती है।

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