काँटों के बीच खिला हुआ लाल गुलाब, दर्द और खूबसूरती का प्रतीक

फूल

काँटों के बीच खिला वह फूल केवल सौंदर्य का प्रतीक नहीं था, बल्कि सहनशीलता की जीवित मिसाल था।
हर पंखुड़ी में छुपा दर्द, हर खुशबू के पीछे अनगिनत चोटों की कहानी थी।उसने सिखाया-ज़िंदगी में खूबसूरती नाज़ुक होने में नहीं,बल्कि टूटकर भी महकते रहने में है।

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पंखुड़ियों में छुपा है सेहत का राज़

गुलाब केवल सौंदर्य का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह सेहत का संरक्षक भी है। इसकी पंखुड़ियों में छिपे गुण न केवल वजन घटाने, तनाव कम करने और त्वचा को निखारने में सहायक हैं, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूती प्रदान करते हैं। आज के समय में गुलाब एक प्राकृतिक इलाज के रूप में फिर से लोगों की पसंद बनता जा रहा है।

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जिंदगी कुछ इस तरह…

एक समय था जब मेरी पसंद की एक शाम हुआ करती थी — चाय की प्याली, साथ में वो दो होंठ, और मेरे दिल के सबसे करीब वो शहर। अब सब कुछ छूट चुका है। मेरी क्यारी का गुलाब, मेरे गाल का गुलाल, मेरी आँखों का काजल, यहाँ तक कि मेरे होठों की तपिश और जिस्म पर चुम्बन की कल्पना तक — कोई और ले गया। दो जिस्म एक धड़कन बनकर जिसे मैं अपना मान बैठा था, वो अब किसी और के दिल में बस गया। मेरे हर अज़ीज़ को रक़ीब अपने नाम कर गया।

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